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________________ .६६२. ज जगच्चूडामणि- भगवान् के १००८ नामो में एक नाम २५।२०६ जगज्ज्येष्ठ-भगवान् के १००८ नामोंमें एक नाम २५।१०३ जगज्ज्योतिष - भगवान् १००८ नामोंमें एक नाम २५।११४ जगज्ज्योतिस्-भगवान्के १००८ नामोंमें एक नाम २५ २०७ जगत्पति- भगवान् के २००८ नामों में एक नाम २५।११८ जगत्पति- भगवान् के १००८ नामों में एक नाम २५१०४ जगत्पाल-भगवान् के १००८ नामोंमें एक नाम २५।२१७ जगद्गर्भ- भगवान्‌के १००८ नाम में एक नाम २५ १८१ जगबन्धु भगवान् के १००८ नामों में एक नाम २५।१९५ जगद्भर्तृ-भगवान्‌के १००८ नामों में एक नाम हितमार्गदर्शकत्वात् जगद् विभति पालयतीति जगद्भर्ता २४३२ जगदादिज - भगवान् के १००८ नामों में एक नाम २५।१४७ जगद्धित- भगवान्के १००८ नामों में एक नाम २५।१०८ जगद्वितैषिन् - भगवान्के १००८ नामोंमें एक नाम २५।१९५ जगद्विभु भगवान् के १००८ नामों में एक नाम २५ । १९५ जगद्योनि- भगवान् के १००८ नामोंमें एक नाम २'५।१३४ जगन्नन्दन - एक मुनिराज ७।३९. जगन्नाथ भगवान् के १००८ नामोंमें एक नाम २५ । १९५ जटाचार्य - वराङ्गचरितके कर्ता जासिंहनन्द आचार्य ११५० आदिपुराणम् | जस्त्र - सुधर्म स्वामीके बाद होनेवाले अनुबद्ध केवल २।१३८ जम्बू - जम्बूस्वामी केवली १।१९९ जय - ग्यारहअङ्ग दशपूर्वके ज्ञाता एक मुनि २।१४३ जयकीर्ति चन्द्रकीर्तिका मित्र ७८ जयन्त-वज्रसेन और श्रीकान्ता का पुत्र ( वानरका जीव ) ११।१७ जयपाल - ग्यारह अङ्गके ज्ञाता एक मुनि २।१४६ 1 जयवर्मा - सिंहपुर के राजा श्रीपेण और सुन्दरी रानीका ज्येष्ठ पुत्र ५।२०५ जयवर्मा-गन्धिलादेश अयोध्या नगरीका राजा ७।४१ जयसेन -रत्नसंचय नगरके राजा महीधर और रानी सुन्दरीका पुत्र, शतधी मन्त्रोका जीव, जो नरकसे निकलकर उत्पन्न हुआ १० | ११६ जयसेन - महासेन और वसुन्धराका पुत्र ७१८६ जयसेन - नागदत्त और सुमतिका 1 पुत्र ६।१२९ जयसेन - एक पुरातन तपस्त्री आचार्य १।५९ जयसेना - धातकीखण्ड विदेहक्षेत्र पुष्कलावती देश पुण्डरीकिणी नगरीके राजा धनञ्जयकी रानी ७१८१ जरत् - भगवान् के १००८ नामोंमें एक नाम २५ । १२४ जागरूक - भगवान्के १००८ नामोंमें एक नाम २५/२०७ जातरूप - भगवान् के १००८ नामोंमें एक नाम २५।१४६ जातरूपाभ- भगवान्के १००८ नामों में एक नाम २५/२०० जितकामारि - भगवान् के १००८ नामों में एक नाम २५।१६९ जितक्रोध - भगवान् के २००८ नामोंमें एक नाम ३५।१६९ जितक्लेश- भगवान्के १००८ नामों में एक नाम २५।१६९ जिनजेय- भगवान् के २००८ नामोंमें एक नाम २५।१३४ जितमन्मथ - भगवान्के १००८ नामोंमें एक नाम २५॥२०८ जिताक्ष - भगवान् के १००८ नामों में एक नाम २५|२०८ जितानङ्ग- भगवान् के १००८ नामों में एक नाम २५।२१६ जितान्तक- भगवान् के १००८ नामोंमें एक नाम २५।१६९ जितामित्र - भगवान् के १००८ नामों में एक नाम २५।१६९ जितेन्द्रिय- भगवान् के नामोंमें एक नाम १५ ।१८६ जिरवर - भगवान् के १०८ नामों में एक नाम जेतुं शोलो जित्वरः १००८ २४४४ जिन - भगवान्‌के १०८ नामोंमें एक नाम २४।४० जिन - भगवान् के १००८ नामोमें एक नाम २५।१०४ जिन कुल्जर - भगवान्के १०८ नामोंमें एक नाम २४/३८ जिनसेन - महापुराण के कर्ता - आचार्य २।१५३ जिनेन्द्र - भगवान्‌के १००८ नामोंमें एक नाम २५ ।१७० जिनेश्वर - भगवान्‌के नामों में एक नाम १००८
SR No.090010
Book TitleAdi Puran Part 1
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2004
Total Pages782
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari, Mythology, & Story
File Size27 MB
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