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________________ (ङ) उपचार को सप्ताह में कई बार दोहरायें। (११) फोबिया, ट्रॉमा और अन्य मनोरोगों के लिए स्व-पूरक स्व-प्राणशक्ति उपचार-- Complementary Self-Pranic Treatment for Phobias, Traumas and other Psychological Ailments जैसा कि आपको विदित है प्राणशक्ति उपचार के दो सिद्धान्त हैं- सफाई तथा ऊर्जन। ट्रॉमा की ऊर्जा, नकारात्मक आदतों, नकारात्मक विचार और नकारात्मक संवेदनों को अपने से दूर हटाने से इन रोगों के उपचार की गति में तीव्रता आती है। यह सफाई नकारात्मक सोच और संवेदनों अथवा नकारात्मक सोच के आकारों की है जो स्वयं में अन्दर भरे होते हैं और जो विभिन्न प्रकार के होते हैं- जैसे फोबिया, ट्रॉमा, विवशता के विचार, विवशता का व्यवहार, बुरी लतों का आदी होना, निराशाजनक विचार/ संवेदन आदि (Phobias, Traumas, Obsessive ideas, Compulsive behaviour, Addiction, Depressing thought, feeling and so on). (क) नकारात्मक सोच के आकारों का बाह्यीकरण तथा उनको नष्ट करना- Externalizing and Disintegrating Negative Thought Entities. (क) (१) आरामपूर्वक रहें और प्राणिक – श्वसन करें | (२) ट्रॉमा का अनुभव, फोबिया, निराशाजनक विचारों और आदतों अथवा नकारात्मक विचार और संवेदनों का बाह्यीकरण करिए। इसके लिए एक सफेद बोर्ड (board) को दृश्यीकृत करके, उस पर अपने फोबिया अथवा नकारात्मक विचार एवम् भावनाओं आदि को प्रेषित करके करिए। दृश्यीकरण स्पष्ट हो या न हो, किन्तु इसका इरादा महत्वपूर्ण है। (३) सफेद बोर्ड पर संग्रहीत नकारात्मक भावनाओं और विचारों को उनको बोर्ड पर मिटाकर (erasing) नष्ट करिए। इनको नष्ट करने की भावना व प्रक्रिया, इनको मिटाने से इंगित होती है।
SR No.090007
Book TitleAdhyatma aur Pran Pooja
Original Sutra AuthorN/A
AuthorLakhpatendra Dev Jain
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages1057
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari, Spiritual, & Yoga
File Size15 MB
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