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________________ ६७० अनुयोगद्वारसूत्र शिष्यमश्नः। उत्तरयति-जघन्यकेन युक्तासंख्येयकेन आवलिका गुणिता अर्थाद-अन्योऽन्याभ्यासः कृतः-जघन्यकयुक्तासंख्येयकगतरूपराशिस्तावतैव राशिना गुणित इति तात्पर्यम्, प्रतिपूर्णः एकरूपापसरणवर्जितो जघन्यकम् 'असंख्येयासंख्येयकं भवति । एतदेव शब्दान्तरेणाह-अथवा उत्कर्ष के युक्तासंख्येयके एक रूपं प्रक्षिप्तं तदा जघन्यकम् असंख्येयासंख्येयक भवति । ततः परम् . अजघन्यानुत्कर्ष काणि स्थानानि भवन्ति । कियदवधि तानि भवन्ति ? इत्याह-यावत् उत्कर्षकम् असंख्येपासंख्येयकं न पाप्नोतिएकोचरिकया वृदया उत्तर--(जहन्नएणं जुत्तासंखेनएणं आवलिया गुणिया, अण्णमागाभासो पडिपुण्णो जहण्णयं असंखेजासंखेजय होह) जघन्य युक्तासंख्यात के साथ आवलिका का गुणाकरो-इसका तात्पर्य है कि-'जघन्य युक्तासंख्घात का जवन्ययुक्तसंख्यात के साथ गुणाकरो और गुणा करने पर जो राशि आवे उसमें से एक कम मत करो-यहां जघन्य असंख्यातासंख्यात है। (अहवा उक्कोसए जुत्तातखेजए रूवं पक्खित्तं जहणणयं असंखेनासंखेज्जयं होइ) अथवा उत्कृष्ट युक्तासंख्यात में एक मिलादोसो जघन्य असंख्यातास ख्यात है। (तेण पर अजहण्णमणुकको. सपाइं ठागाइं जाव उस्कोन असंखेजासंखेज्जयं ण पावह) इसके बाद अजघन्यानुस्कृष्ट के स्थान होते हैं। और ये स्थान वहां तक होते हैं कि, जब तक उस्कृष्ट असंख्यातासंख्मत नहीं आ जाता । उत्कृष्ट असंख्यातासंख्घात स्थान लाने के लिये जघन्य असंख्यातसंख्यात से ते ८ युद्धतास यात उपाय छे. (जहण्णय असंखेज्जासंखेजय केवश्य' होह १) महत! धन्य रे मध्यातासभ्यात छ, तनु. ५१३५ छ? उत्तर-जहन्नएण जुत्ता संखेन्जएणं आवलिया गुणिया, अण्णमण्णभासो पडिपुण्णो जहण्णय असंखेज्जासंखेन्जय होइ) गधन्य युस्ताभ्यातनी સાથે આવલિકાને ગુણાકાર કરો આનું તાત્પર્ય આ પ્રમાણે છે કે જઘન્ય ચુકતાસંખ્યાતને જઘન્ય યુક્તાસંખ્યાતની સાથે ગુણાકાર કરો, ગુણાકાર કરવાથી જે રાશિ આવે તેમાંથી એક છે કરે, નહિ તો એજ જઘન્ય असभ्यातायात छ. (अहवा उक्कोसए जुत्तासंखेज्जए एवं पक्खितं जहण्णय' असंखेज्जासंखेन्जय होइ) अथ Gere युस्तासयातभा से न त तपन्य अभ्यातायात 45 mय छे. (तेण पर अजहण्णमणुककोसयाई ठाणाई जाव उस्कोस असंखेज्जासखेजय' ण पावइ) त्यार પછી અજઘન્યાનુલ્ફસ્ટનાં સ્થાને હોય છે. અને તે સ્થાને ત્યાં લગી હોય
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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