SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 511
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ Re नुयोगद्वारसूत्रे मदिराम् आस्वादनेन, वस्त्रं स्पर्शेन । तदेतद् गुणेन । अथ किं तत् अवयवेन ? अवयवेन-महिषं शृङ्गेण कुक्कुटं शिखया, हस्तिनं विषाणेन, वराहं दंष्ट्रया, मयूर पिच्छेन, अश्वं खुरेण, व्याघ्र नखेन, चमरौं वालाग्रेण, वानरं लाङ्लेन, द्विपदं मनुष्यादि, चतुष्पदं गावादिकं, बहुपदं गोमिकादि, सिंह केशरेण, वृषभं ककुदा, महिला बळयबाहुना। मान क्या है ? (गुणेणं) गुणलिङ्ग जन्य शेषवन् अनुमान इस प्रकार से है-(सुवण्णं निकसेणं पुप्फ गंधेणं, लवणं रसेणं महरं आसाइएणं, पत्थं फासेणं सेतं गुणे) निकष-कसौटी पर घिसने पर उछरी हुई रेखा से सोने का अनुमान करना गंध से पुष्प का अनुमान करना, रस से नमक का अनुमान करना, आस्वाद से मदिरा का अनुमान करना स्पर्श से वस्त्र का अनुमान करना, ये सब गुणनिष्पन्न शेषवत् अनुमान हैं। (से कि तं अवयवेणं) हे भदन्त ! अवयवा लिङ्ग से निष्पन्न शेषवत् अनुमान क्या है ? (अवयवेणं) अवयवरूप लिङ्ग से निष्पन्न शेषवत् अनुमान इस प्रकार से है-(महिसं सिंगणं कुक्कुडं सिहाए, हस्थि विसाजेणं, वसह दाढाए मोरं पिच्छेणं, आसं खुरेणं, घग्धं नहेणं, चमार वालग्गेणं, वाणरं लंगूलेणं दुपयं अणुस्सादि चउप्पयं गवयादि, बहुप्पयं गोमियादि, सीहं केसरेणं, वसहं ककुरण महिलां वलयबाहाए) शृंग से महिष को, शिखा से कुक्कुट को, विषाण से हाथी को, दंष्ट्रा से बराह को, पिच्छ से લિંગજન્ય શેષવતુ અનુમાન શું છે? (rળે) ગુણલિંગ જન્યશેષવત્ અનુમાન मा प्रमाणे छे. (सुवणं निकसेण पुफ गंघेणं लवणं रसेणं मइरं भासायएणं वत्थं फासेणं, से त'गुणेणं) निष-सोटी-५२ सपाथी सोटी ५२ थी २माએથી સોનાનું અનુમાન કરવું, ગંધથી પુષ્પનું અનુમાન કરવું, રસથી લવશુનું અનુમાન કરવું, આસ્વાદથી મદિરાનું અનુમાન કરવું, સ્પર્શથી વસ્ત્રનું अनुमान ४२, म wai शुनियन शेषतू. अनुमान छे: (से किं अवयवेणं) Data ! अ१य१३५ लिथी निपन शेषषत् अनुमान छे. (अवयवेणं) अ१य१ ३५ बिजयी नियत शेषत अनुमान 40 प्रमाले छे. । (महिसं सिगेणं कुक्कुड सिहाप, हत्थि विसाणेण, वराह दाढाए मोरं पिच्छेण पास खुरेणं, वग्धं नहेणं, चमरिं वालग्गेणं, पाणरं लंगूलेण, दुपयं मणुरसादि चउ. प्पयं गवयादि, बहुप्पयं गोमियादि, सीहं केसरेणं, वसई ककुए महिलां वलय पाहाप) यी महिप, शिमाथी ३३४नु, विषायी साथीन माथी
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy