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________________ ૩૬ अनुयोगद्वारसूत्रे हलेन हालिकः, शकटेन शाकटिकः, रथेन रथिकः, नावा नाविकः । स एष मिश्रः । स एष द्रव्यसंयोगः । अथ कोऽसौ क्षेत्रसंयोगः ?, क्षेत्रसंयोगः- भारतः एरवतः, हैमवतः ऐरण्यवतः, हरिवर्षः, रम्यकवर्ष : देवकुरुजः उत्तरकुरुनः पूर्ववैदेहकः, अपर " द्रव्य हैं। छत्र जिसके पास है, वह 'छत्री ' । दण्ड जिसके पास है, वह ' दण्डी' पट जिसके पास है, वह 'पटी' इत्यादि नामवाला कहलाता है । (से किं तं मीसए ? मीसए - हलेण हालिए सागडेगं सागडिए, रहेणं सहिए नावाए नाविए, से त्तं मीसए से नं दव्य संजोगे) हे भदन्त ! मिश्र द्रव्य संयोगज नाम कैसा होता है ? उत्तर - मिश्र द्रव्य संयोगज नाम ऐसा होता है-जैसे- हल के संयोग से हालिक, शकट के संयोग से शाकटिक, रथ के संयोग से रधिक नाव के संयोग से नाविक ये सब नाम सचित्त अचित्त उभय द्रव्य संयोगज हैं। इस मिश्र द्रव्य संयोगज नाम में सचित्त द्रव्य संयोग नाम हालिक, शाकटिक आदि में हल आदि पदार्थ अचिन्त और बलीवर्द - बैल आदि पदार्थ सचित्त हैं । इस प्रकार के और भी जितने नाम हों वे सब द्रव्य संयोगज नाम जानना चाहिये। (से किं तं वित्त संजोगे) हे भदन्त ! क्षेत्र संयोग-क्षेत्र संयोग से निष्पन्न नाम कैसा होता है ? उत्तर- (खित्तसंजोगे) क्षेत्रसंयोगज नाम ऐसा होता है- (भारहे છે તે છત્રી, દઉંડે જેની પાસે છે તે દડી, પટ જેની પાસે છે તે પટી, વગેરે नाभथी संबोधित थाय छे. (से किं तं मीसए ? मीसए - इलेण हालिए सागडेर्ण नागडिए, रहेणं रहिए नावाए, नाविए, सेत्तं मीसए सेत्तं दव्ब संजोगे) हे लह'त ! મિશ્ર દ્રવ્ય સચાગ જ નામ કેવું હોય છે ? ઉત્તર–મિશ્ર દ્રવ્ય સચૈાગ જ નામ એવું હાય છે જેમ કે હળના સÂગથી હાલિક, શકટના સચૈાગથી શાર્કટિક, રથના સંચાગથી રથિક, નાવના સચાગથી નાવિક, આ સર્વે નામેા સચિત્ત અચિત્ત અને ઉભય દ્રવ્ય સચૈાગ જ છે. આ મિશ્ર દ્રવ્ય સચાગ જ નામમાં સચિત્ત દ્રવ્ય સંચાગ નામ હાલિક, શાટિક વગેરેમાં હલ વગેરે પદાર્થ અચિત્ત અને ખલી (બળદ) વગેરે પદાથ સચિત્ત છે. આ જાતના બીજા પણ જેટલાં નામે છે તે સર્વે દ્રવ્ય સાગ નામા છે એમ सम बेवु. (से किं तं खित्तसंजोगे) डे लहन्त ! क्षेत्र સયેાગ-ક્ષેત્ર સચૈાગથી નિષ્પન્ન નામ કેવું હાય છે ? उत्तर- (खित्तसंजोगे) क्षेत्र सयोग न नाम मेवु होय छे. (भारहे
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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