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________________ अनुयोगन्द्रिका टीका सूत्र २०९ द्रव्यस्वरूपनिरूपणम् ३७५ पञ्चेन्द्रियतिर्यग्योनिका, असंख्येयाः मनुष्याः, असंख्येया व्यन्तरा, असंख्येयार ज्योविष्का, असंख्येया वैमानिकाः, अनन्ता सिद्धाः, तत् एतेनार्थेन गौतम ! एवम् उच्यते-नो संख्येयानि नो असंख्येयानि अनन्तानि ॥ सू० २०९ ॥ टीका-'काविहा णं भते' इत्यादि द्रव्याणि हि जीवद्रव्याजीवद्रव्यमेन द्विविधानि प्रज्ञप्तानि । तवारपवक्तन्यत्वात् पश्चानिर्दिष्टान्यपि अजीवद्रव्याणि व्याख्यातुमाह-'अजीवदवाण' गौतम ! असंख्यात नारक हैं, असंख्यात असुरकुमार देव हैं यावत् असंख्यात स्तनितकुमार हैं । असंख्यात पृथिवीकायिक है, यावत असंख्यात वायुकायिक हैं, अनंतवनस्पतिकाधिक हैं। (असंखेज्जा बेई. दिया) असंख्यात दो इन्द्रियवाले जीव हैं । (जाव असंखिज्जा चउरिदिया, असंखिज्जा पंचिदियतिरिक्खजोणिया) यावत् असंख्यात चार इन्द्रियवाले जीव हैं, असंख्योत पांच इन्द्रियवाले तिर्यश्च जीव हैं। (असंखिज्जा मणुस्सा असंखिज्जा वाणमंतरा, असंखिज्जा जोइसिया, असंखिज्जा वेमाणिया) असंख्यात मनुष्य हैं, असंख्यात न्यन्तरदेष हैं, असंख्यात जोतिष्कदेव हैं, असंख्यात वैमानिक देव हैं, (अणता सिद्धा) और अणंत सिद्ध हैं । (से एएणद्वेणं गोयमा! एवं धुच्चर नो संखिज्जा नो असंखिज्जा, अणंता) इसलिये हे गौतम ! मैं इसी अर्थ को लेकर ऐसा कहता हूँ कि जीवद्रव्य न संख्यात है, न असं. ख्यात है किन्तु अनंत है। કુમાર દે છે, યાવત્ અસંખ્યાત સ્વનિતકુમારે છે. અસંખ્યાત પ્રથિવીકાયિકે છે યાવત્ અસંખ્યાત વાયુકાયિકો છે, અનંતવનસ્પતિકાયિકે છે. (असंखेज्जा बेइंदिया) असभ्यात मेन्द्रियावा॥ ७छ. (जाव असखिजा चडरिदिया अखिज्जा पंचिंदियतिरिक्खजोणिया) यावत् असभ्यात यार ઇન્દ્રિયવાળા જીવે છે, અસંખ્યાત પાંચ ઈન્દ્રિયવાળા તિ"ચ જીવે છે, (अनखिज्जा मणुस्सा असंखिज्जा वाणमंतरा, असखिज्जा जोइसिया असखिया वैमानिया) सात मनुष्य। छ, मसभ्यात तो छ, सस'च्यात न्याति वा छे, अस यात वैमानि हेवा. (अणंता सिद्धा) म अत. सितो छ (से पएगणं गोयमा ! एवं वुच्चइ नो संखिज्जा नो अनखिज्जा अणंता) એટલા માટે હે ગૌતમ ! હું એજ અર્થના આધારે આ પ્રમાણે કહું છું કે જીવ બે સંખ્યાત નથી અસંખ્યાત નથી પરંતુ અનંત છે.
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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