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________________ ९. ३६८. अनुयोगद्वारसूत्रे P खलु भदन्त ! कतिविधानि प्रज्ञप्तानि ? गौतम । द्विविधानि ज्ञवानि, तद्यथारूप्य - जीवद्रव्याणि अरूप्यजीवद्रव्याणि च । अरूप्य जीवद्रव्याणि खलु मदन्त । कविविधानि प्रज्ञप्तानि ? गौतम । दशविधानि मज्ञप्तानि तद्यथा-धर्मास्तिajit धर्मास्तिकस्य देशाः धर्मास्तिकायस्य प्रदेशाः, अधर्मास्तिकायोऽधर्मास्विकायस्य देशा अंधर्मास्तिकायस्य प्रदेशाः, आकाशास्तिकाय आकाशास्तिकायस्य देशाः आकाशास्तिकायस्य प्रदेशाः, अद्धासमयः । रूप्यजीवद्रव्याणि खल्ल (अजीव दव्वा णं) अजीव द्रव्ध (अंते) हे मदन्त (कविहा) कितने प्रकार का (पण्णत्ता) प्रज्ञस हुआ है । (गोयमा) है गौतम ! (दुबिहा) दो प्रकार का (पण्णत्ता) प्रज्ञप्त हुआ है । (तं जहा) वे उसके प्रकार ये हैं(रूवी अजीब दव्वा य, अरुवी अजीबच्वा थ) एक रूपी अजीवद्रव्य और दूसरा अरूपी अजीव द्रव्यं । (अरुत्री अजीवदव्वा णं भते कई विहा पण्णत्ता) अरूपी अजीव द्रव्य है भदंत ! कितने प्रकार का कहा गया ? (गोयमा) हे गौतम । (दशविहा पण्णत्ता) दश प्रकार का कहा गया है । (तं जहां वे दश प्रकार ये हैं-- (धम्मत्थिकाए, धम्मत्थि कायस्स -देसा, धम्मस्थिकायस्त परसा) धर्मास्तिकाय १- धर्मास्तिकाय के देश २, धर्मास्तिकाय के प्रदेश ३, (अधम्मत्थिकाए, अधम्मत्थिकायस्स देसो, 'अधम्मत्थिकापस्स पएस) अधर्मास्तिकाय ४, अधर्मास्तिकाय के देश ५, अधर्मास्तिकाय के प्रदेश ६, ( आगासत्थिकाए, आगासत्थि कायस देसा, आगासात्थिकायस्स पएसा) आकाशास्तिकाय ७. आकाशास्तिकाय के देश ८, आकाशास्तिकाय के प्रदेश ९, (अद्धासमए) और (कडुविन) डेंटला प्र४।२नु (पण्णत्ता) प्रज्ञप्त थप्रैस छे (गोयमा ।) ३ गोलभ (दुबिद्दा) में प्रारड (पण्णत्ता) प्रज्ञप्त श्रयेस छे (वेज़हा) ते प्राश या समा " (ह्नवी अजीवदव्वा य, अह्नवी अजीवदव्वा य) २४ ३धी अनुव द्रव्य श्रीलु ा३ची अलव द्रव्य (अरुवी अजीवदव्वा णं भंते ! कइविहा पण्णचा ३ म द्रव्य डे लढत 1 डेटा प्रभानु प्रज्ञप्त थयेस छे ! ( गोयमा) हैं गीतभ | (दखबिहा पण्णत्ता) ६A) अठारनु' 'डेवामां आव्यु छे. (तं जहा) तै: ६श પ્રકાશ या प्रमाणे थे, (धम्मत्थिकार धम्मत्थिकार दिखा, धम्मत्थि १८- कायस्थ पंएखा) धर्मास्तिद्वाय १, धर्मास्तिठायना हेश २, प्रभस्तियना प्रदेश 13, (अधम्मत्थिकाए, अधम्मस्थिकायरस देखा अधम्मात्थिकायम परसा) भस्तिठाय ४, अधर्मास्तिकायना हेश प, अपभ्रस्तियंना प्रदेश ६, (शाखा“स्वत्थिकाए आगास्स्रत्थिकायस्थ देसा, आताधत्थिकायस्थ पारखा) शास्तिकाय ७) आमशास्तियना देश ८, आठाशांस्तिठायना अद्देश - E) (अद्धासमए) ने 7 +
SR No.040004
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1968
Total Pages925
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size147 MB
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