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________________ अनुयोगवन्द्रिका टी का सूत्र १४९ चतुर्नामनिरूपणम् ६७५ सागया' दण्डस्य-अंग्रे दण्डाग्रम् , सा-आगता साऽऽगता' इत्यादि बोध्यम् । विकारो हि वर्णस्य स्थाने वर्णान्तरापादनरूपः । नामवंचात्र तेन तेन रूपेण नमनात् परिणमनाद् बोध्यम् । लोके हि यान्तः शब्दास्ते आगमाघन्यतमनिष्पन्ना एव सन्ति । ये च डित्य डवित्थादयः कश्चिदव्युत्पन्नत्वेनाभिमतास्तेऽपि शाकटायनमते व्युत्पन्ना एव । उक्तंच "नाम च धातुमाह निरुते, व्याकरणे शकटस्यच स्तोकम् (अपत्यम् )। यन्न पदार्थविशेष समुत्थं, प्रत्ययतः प्रकृतेश्च तदूह्यम्" ॥इति। इत्थं च सर्वेषां शब्दानामागमादिमिश्चभिः संग्रहादिदमागमादिकं चतुर्नामेत्युच्यते। प्रकृतमुपसंहरन्नाह-नदेतच्चतुर्नामेति ॥५० १४९॥ इह-नईह महु+उदगं+प्रहृदगं, वह महोब्रहहो। दण्ड+अग्र-दण्डाग्र सा+ आगतासागता दधि+इदंदधीदं नदी+हनदीह, मधु+उदक-मधूदक, वधू+ऊह वधूहः (सेत विगारेणं) इस प्रकार के ये शब्द विकार निष्पन्न नाम हैं । ( से नं च उणामे ) ये पूर्वोत चतुर्नाम हैं। भावार्थ--आगम निष्पन्न, लोप निष्पन्न, प्रकृति नियन्न और विकार निष्पन्न इस प्रकार से चतुर्नाम चार प्रकार के होते हैं। आगम रूप अनुस्वार से जो शब्द निष्पन्न होते हैं वे आगम निष्पन्न चतुर्नाम है जैसे प्राकृत भाषा में वंक, वयंसे, अई मुंतए ये शब्द हैं। "वक्रादावन्तः" इस सूत्र से प्राकृत भाषा में वक्रादि शब्दो में आगमरूप अनुस्वार होता है। "वंक" शब्दकी संस्कृत छाया "यकम्" है। वयंसे "शब्द की अग्ग-दंडगं, सा+आगया AISऽगया, दहि । इणं-दहीणं, नई इह-नईह, महर उदगं=महूदगं, बहूxअहो बर्हो) ६+ ६, सा+आगतासागता, दधिx इदं धीह, नीनहीड, मधु+उदक-म५६४, वधूxऊह-वधूडः (से तं विगारेणं) मा मा २०४। विनि०५न्न नाभी छे. (से तं चउणामे) मा मयां નામે પૂર્વોક્ત ચતુર્નામ રૂપ ગણાય છે. ભાવાર્થ-ચતુનમના ચાર પ્રકાર છે-આગમનિષ્પન, લેપનિષ્પન, પ્રકતિનિષ્પન, અને વિકારનિષ્પન આગમ રૂપ અનુસ્વાર વડે જે જે શબ્દો બને તેમને આગમનિષ્પન્ન ચતુર્નામ રૂપ સમજવા જેમ કે પ્રાકૃત ભાષાના "बंकं, वयंसे अने अइमुंतए" ! शो भागमनि०५-न यतु भा छे. " वादावन्तः” । सूत्र मे पात ८ ७२ छ , प्राकृत भाषामा And शण्टामा ३५ अनुस्वार डाय छे. "वं" मा प्राकृत शासन संस्कृत छाया "वक्रम् ” छे. “वयंसे" I प्राकृत ५४नी सस्त या
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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