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________________ अनुचोगवन्द्रिका टीका सूत्र ९६ अनुगमस्वरूपनिरूपणम् पन्चाई कयरंमि भावे होज्जा ? ) संग्रहनय मान्य आनुपूर्वी द्रव्य किस भाव वाले हैं ? उत्तर- (नियमा साइपारिणामए भावे होज्जा) संग्रहनय मान्य मानुपूर्वीद्रव्य नियम से सादिपारिणामिक भाववाले हैं । (एवं दोन्निवि) इसीप्रकार से दोनों आनुपूर्वी और अवक्तव्यकद्रव्यों के विषय में जा. मना चाहिये। (अप्पा बहुनस्थि ) राशिगत द्रव्यों में अल्प यहुत्व नहीं माना गया है । क्योंकि इस संग्रहनय में राशिगत द्रव्यों का अस्तित्व व्यवहारनयरूप कल्पना मात्र से ही मान्य हुआ है। तात्पर्य कहने का यह है कि संग्रहनय की दृष्टि आनुपूर्वी द्रव्यों में अनेकत्व काल्पनिक हैं। क्यों कि व्यवहारनय इस बात को स्वीकार करता है कि आनुपूर्वी द्रव्य प्रत्येक अनेक हैं । इसलिये यह अनेकत्व सामान्य रूप भानुपूर्वी त्व की दृष्टि में विलीन के कारण है ही नहीं। __ शंका-यदि यही बात है तो फिर सूत्रकार ने इस संग्रहनय मान्य अनुगम के प्रकरण में "संग्रहस्य आनुपूर्वी द्रव्याणि किं संख्येयानि" आदि पहुवचनान्त पद में आनुपूर्वी द्रव्य को क्यों रखा है ? "आनुपूर्वी प्रश्र-( संगहस्स आणुपुव्वी दवाइ कयरंमि भावे होज्जा ?) सहनय. માન્ય આનુપૂર્વી દ્રવ્ય કયા ભાવથી યુકત હોય છે ? उत्तर- नियमा साइपारिणामिए भावे होज्जा) सनयमत मानुभूती द्रव्या नियमयी ५ सहिपारिवामि भाणाय छे. (एव दोन्नि वि) એજ પ્રમાણે સંગ્રહનયસંમત અનાનુપૂર્વી દ્રવ્ય અને અવક્તવ્યક દ્રવ્ય પણ नियमथी १ सहिपारिभिर माणi हाय छे (अप्पा बहू' नत्थि) શિગત દ્રવ્યમાં અ૫બહત્વ માનવામાં આવ્યું નથી, કારણ કે આ સંગહનયમાં રાશિગત દ્રવ્યોનું અસ્તિત્વ વ્યવહાર નયરૂપ કલ્પના માત્રથી જ માન્ય થયું છે. આ કથનનું તાત્પર્ય એ છે કે સંગ્રહનયની દષ્ટિએ આ પૂર્વ દ્રવ્યમાં અનેકત્વ કાલ્પનિક છે, કારણ કે વ્યવહાર નય એ વાતને સ્વીકાર કરે છે, કે પ્રત્યેક આનુપૂર્વી દ્રવ્ય અનેક છે. અને તે અનેકત્વ સામાન્ય ૩૫ આનુપૂવવની દષ્ટિમાં વિલીન થઈ જવાને કારણે છે જ નહીં. શંકા-જે એવી હકીકત હોય તે સૂત્રકારે આ સંગ્રહનયમાન્ય અનુગ. भना प्रभा " संगहस्म आनुपूर्वी द्रव्याणि किं संख्येयानि " या मह. पचनान्त 48i भानुषी द्रव्यने म भू १ "" आनुपूर्वी व्य"
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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