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________________ - - - . अनुयोगवारस्त्रे पञ्चविधेषु ज्ञानेषु श्रुतज्ञानस्यैव उद्देशसमुद्देशाद्यवसरेऽधिकारोऽस्ति, नेतरेपामिति बोधयितुमाह मूलम--तत्थ चत्तारि नाणाई ठप्पाइं ठवणिजाई गो उद्दिसति, गो समुदिसंलि, णो अणुषणविज्जति । सुयनाणस्स उद्देसो समुदेसो अणुण्णा अगुओगो य पवत्त ॥ सू० २ ॥ छा । तत्र चत्वारि ज्ञानानि स्थाप्यानि स्थापनीयानि नो उद्दिश्यन्ते, नो समुद्दिश्यन्ते, नो अनुज्ञाप्यन्ते । श्रुतज्ञानस्य उद्देशः समुद्देशः अनुज्ञा अनुयोगश्च प्रवर्तते।सू०२। टीका-'तत्य बत्तारि' इत्यादि तत्र-तेषु पञ्चविधेषु ज्ञानेषु चत्वारि-चतुःसंग्ख्यकानि ज्ञानानि आमिनिबोविकाध्यमिनःपर्यवकेवलरूपाणि अंक हार्याणि-न व्यवहाराहा॑णि 'ठप्पाई' स्थाप्यानि उद्देशसमुद्देशाद्यसरे अत एव 'ठवणिज्जाइ' स्थापनी यानि अनधिकृतानि । न तेषामुद्देशादयः क्रियन्ते इति भावः । अब सूत्रकार यह प्रकट करते हैं कि पांच प्रकार के जो ये ज्ञान हैंइनमें श्रुझान का ही उद्देश, समुद्देश आदि के अवसर में अधिकार है दसरे चार ज्ञानों का नहीं-- “त्य चत्तारि"-इत्यादि । ॥ २॥ शब्दार्थ:-(त्य) इन पूर्वोक्त पांच प्रकार के ज्ञानों में (चत्तारि नाणाई) चार प्रसार के ज्ञान-मति-अवधि, मनःपर्यय और केवलज्ञान-(ठप्पाइ) उद्देश, समुद्देश आदि के अवसर में व्यवहारयोग्य नहीं हैं । क्यों कि ये गुरु के उपदेश की अपेक्षाबाले नहीं हैं। इसलिये (ठवणिज्जाई) ये स्थापनीय हैंअर्थात् इनके उद्देश आदि नहीं-किये गये हैं । इस विश्य में ऐसा जानना चाहिये कि श्रुतज्ञान ही वाचना आदि द्वारा अपने विषयभूत पदार्थों में હવે સૂત્રકાર એ પ્રકટ કરે છે કે પાંચ પ્રકારના જે જ્ઞાન છે તેમાંથી શ્રુતજ્ઞાનનો જ ઉદ્દેશ, સમુદેશ આદિને અવસરે અધિકાર છે-અન્ય ચાર જ્ઞાનેને નથી. __ "तत्थ चत्तारि" त्या शा-(तत्थ) पूठित पांय ४२i ज्ञानामांथी (चत्तारि नाणाई) यार પ્રકારનાં જ્ઞાન એટલે કે મતિજ્ઞાન, અવધિજ્ઞાન, મનઃ પર્યવજ્ઞાન અને કેવળજ્ઞાન (ठप्पाई) हेथ, समुदेश माहिना ५१सरे व्यवहारयोग्य नथी. ४१२५ यारे ज्ञानभा गुरुना 6५देशनी अपेक्षा २रेती नथी, तेथी (ठवणिज्जाइ) ते थारे ज्ञान સ્થાપનીય છે. એટલે કે તેમના ઉદ્દેશ આદિ કરવામાં આવેલ નથી આ વિષયને અનુલક્ષીને એવું સમજવું જોઈએ કે શ્રુતજ્ઞાન જ વાચના આદિ દ્વારા પિતાના
SR No.040003
Book TitleAnuyogdwar Sutra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKanhaiyalal Maharaj
PublisherA B Shwetambar Sthanakwasi Jain Shastroddhar Samiti
Publication Year1967
Total Pages861
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari, Book_Gujarati, & agam_anuyogdwar
File Size249 MB
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