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________________ भाषाटीकासहित. 131 न्यपर छाई है. वह उसकी चितवन मन्द हंसनि व मोतीसे दशन मेरे इस मनको लुभारहे हैं उसकी मोहनी मूर्ति मेरे दिलमें समाई है, बहुतेरा में उसको भुला रहीहूं परंतु नहीं भूलती. हे सखियो ! यदि तुम मेग प्राण बचाना चाहती हो तो वहीं मोहनी मूर्ति मुझको दिखाओ; यह कहकर सुन्दरीने यह दोहा पढ़ा दोहा-हे प्यारेकितको गयें नेह नवीनलगाय। - अंखियां प्यासीरूपकी, देहु दर्श किन आ य॥९॥ . इसप्रकार सुन्दरीको अधीर देखकर एक सहेली कहने लगी, हे प्यारी सुन्दरी ! धीरज धरो, बिना सोच विचारे इतना प्रेम करना उचित नहीं हैदो०-नारायण धीरज धरेधीरेसबकुछहोय। माली सींचे वृक्ष नित, ऋतु आये फल होय ॥१०॥काजमाहिं धीरज धरै,सो कारज फ.. लदाय ॥जलदी करनो काजमें, काजहि देत नशाय॥११॥ सोच समझलीजै हृदय, जब P.P.AC.Gunratnasuri M.S. . Jun.Gun Aaradhak Trust
SR No.036492
Book TitleStree Charitra Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorNarayandas Mishr
PublisherHariprasad Bhagirath
Publication Year1920
Total Pages205
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size158 MB
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