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________________ प्रस्ताव // 25 // श्रीपाल डरी! इतने में तुरन्त ही वे लोग बोले-दे भद्रे! इस प्रकार स्वरूपवती, महामूल्यआभरणचरित्र, विराजिता, भयसे कम्पित तनुलतावाली तूं कौन है ? और इस विकट मार्ग पर कैसे चड़ आई है। है ? इत्यादि सत्य 2 कथन कर! हम लोगोंका किसी तरह भय मत करना हम सब तेरे भाई। समान हैं-ये विश्वासपात्र शब्द सुनकर रानीने निर्भयतासे अपना सब वृतान्त कह सुनाया | " इनके विना अपना निर्वाह नहीं हो सकेगा” ऐसा सोचकर पुनः रानी बोली-अहो भाईयों! | हम दोनोको अजितसेनसे रक्षा करो? उन लोगोंने आश्वासन दिया और उसका बालपुत्र एक खच्चर पर बैठाकर वस्त्रसे ढक दिया, इधर एक कुष्टिके वहान पर उस रानीको वेश बदला कर || बैठा दी, इस वख्त रानीने विचारा कि अब भी मेरे कुछ पुण्य अवश्य है कि इस प्रकार सुसं- ||2|| 15 योग मिला है. .. . . इतना हो चुकनेके बाद अजितसेनके सुभट " मार-मार” शब्द करते हुवे वहां पर आन पहुँचे ORIGAIRIRASCLISAIASSASSICA-96406 ककककबाल // 26 MAC.GunratnasuriM.S. Jun Gun Aaradha
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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