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________________ ल SHAHREALANAGE भावार्थः-परमानन्दरूपी लक्ष्मी है निवास स्थान जिसका ऐसे अनन्त ज्ञान-दर्शन-चारित्र और वीर्य गुणचतुष्ठय विराजित सिद्ध जगवानको पुनः 2 नमस्कार होवो-दूर किये हैं अभिनिवेशादि कुत्सित ग्रहों जिसने ऐसे सूर्य समान आचार्य महाराज को नमस्कार होवो. (गाथा) मुत्तत्थ वित्थारण तप्पराणं / नमो नमो वायक कुंजराणं // साहूण संसाहिय संजमाणं / नमो नमो सुद्धदया इमाणं // 3 // जावार्थः-सूत्रार्थके विस्तारमें तत्पर, समुदायकी शोभा करनेमें समर्थ कुंजर हस्ति समान || || उपाध्याय महाराजको वारं 2 नमस्कार होवो-सम्यक् प्रकारसे साधन किया है संयम जिसने | ऐसे प्रशम गुणको धारण करने वाले दयावान्, जितेन्द्रीय साधु महाराजको अनेक वार नम- ||7|| |स्कार होवो. . SUHAGAURUSH* (गाथा) &aa जिणत तत्तेरुड लक्खणस्स / नमोनमो निम्मल सणस्स // अनाणं संमोह तमो हरस्स / नमोनमो नाण दिवायरस्स // 4 // HORAC.GunratnasuriM.S. Jun Gun Aaradha
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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