SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 138
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ (श्लोक ) . प्रस्ताव यत्संचितं पूर्वजजन्मनीह / तेनैव पुण्येन भवन्ति कामाः // . . चौथा. भोगाश्च राज्यानि शिवेन्द्ररौघाः। तस्यैव दासाश्च त्रिलोकलोकाः॥५॥ ___भावार्थ:--पूर्व भवमें जो संचय किया है उसही पुण्यसे इस भवमें भाग-समृद्धि-राज्यलक्ष्मी और मोक्षपद वगेरा इच्छाएं प्राप्त होती हैं-उसही महापुरुषके तीन लोकके जन दास होते हैं. ___ ये पांचों समस्याओंकी पूर्ति सुनकर श्रृंगारसुन्दरी अपनी सखियों सहित आश्चर्य सगरामें गोता लगाने लगी और मनोगत जावोंकी पूर्ति जानकर उन कुमारको वरे यानि पतिराज पने 8 स्वीकारे-पुत्तलिये द्वारा कुमारने समस्याओं पूरी यह सुन कर राजा हर्षित हुवा और विवाह | सामग्री तैयार करा कर पांचों सहेलियों सहित शृंगार सुन्दरीका विवाह महोत्सव पूर्वक श्री. पाल कुमारके साथ किया; कर मोचनके समय बहुतसा माल-असबाब, सेनादि देकर एक मोटाई मकान रहेनेको दिया, अब कुमार वहांपर सानन्द निवास करते हैं...... . SCAGLIARIAS GRAIKAS AAGRA HEAc. Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhat
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy