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________________ बरAARRERA राज! कान्ति नगरसे में आया हूँ और कम्बू छीप जाना है, रास्ते मैने एक अजायब देखा है, | || वह सुनियेगाः-हे पुण्य-पुंज! यहांसे सातसो जोजन दूर कुंडलपुर नामका एक नगर है, वहां 8 पर मकरकेतु नामका राजा है और कर्पूरतिलका नामकी रानी है, उसकी कुक्षिसे उत्पन्न हुवे || | सुन्दर और पुरन्दर दो पुत्र हैं, उनपर गुणसुन्दरी नामकी एक कन्या है, उसने ऐसी प्रति ज्ञा की है कि जो मुझे वीणा-नादमें जीतेगा वही मेरा पति हो सकेगा, दूसरा नहीं-उस प्रतिज्ञाको सुनकर अनेक राज-पुत्र वहां पर आकर वीणाका अभ्यास करने लगे हैं, प्रतिमास | उनकी परीक्षा ली जाती है, मगर आजतक किसीने भी उस राज-कुंवरीको वीणाद्वारा न है जिती, परीक्षाके दिन एक वख्त उस देवकन्या सदृश कुमारिकाको मैने देखी थी, भाग्यवश | | आपके साथ समागम हो जाय तो अत्युत्तम है-तब श्रीपालजी उस पुरुषको वस्त्रादि देकर शायं| कालमें अपने स्थानपर आये और विचारने लगे कि यह आश्चर्य किस तरह देखा जाय? फिर | सोचने लगे कि संकल्प-विकल्प करनेकी क्या जरूरत है ! नवपद महाराजके ध्यानसे सब कुछ RIAC.Gunratnasun M.S. . Jun Gun Aaradhal
SR No.036490
Book TitleShripal Charitra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagar
PublisherGaneshmal Dadha
Publication Year1924
Total Pages198
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size10 MB
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