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________________ सारखो जाणता, // 545 // (अने तेथी) हा पिताजी ! हा स्वामी! हा रक्षक ? एम (पोकार करी) रडता एवा (तेना) पुत्रोने, (नी) राणीओने, तथा (नगरना लोकोने (सत्य हकीकत) समजावीने ते देव / / 546 // ते बखते (त्या) खुशीयी आवेला बीजा समकीती देवोनी साथे पोताना ते पुण्यशाली मित्रनु उत्तक्रियारूप कार्य करीने, // 547 // तथा ते राज्यपर ते पुण्यात्य राजाना पुण्यसार नामना पुत्रने स्थापन करीने, (तथा तेने पश) श्री जिनेश्वर प्रभुती पूजा करणा माटे शिखामण / आपीने ते इस्तिदेव (त्यांथी) देवलोकमा गयो // 548 // चतुर्भिः कलापकं // एची रीते हंसाकेशचना दष्टांतसहित पुण्यनी स्वातरी माटे पुण्याढय राजानी कथा संपूर्ण थइ. // इति पुण्यप्रामाण्ये श्रीपुण्याढ्यचरित्रं समाप्तं. आ चरित्र श्रीवर्धमानसूरिविरचित श्रीवासु त्रनामना महाकाव्यमांथी स्वपरना श्रेय माटे ओधरीने तेना अन्वय तथा गुजरातीभाषांतर सहित पंडित श्रावक हीरलाल हंसराजे पोताना श्रीजैनभास्करोदय छापखानामां छापी प्रसिद्ध कयुं छे. // Jun Gun Aaradhak Trust P PAC Gunnan MS
SR No.036475
Book TitlePunyadhya Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1928
Total Pages229
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size64 MB
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