________________ प्रहरीका स्थिताः // पद्ध्वा श्व रक्ता मे / शोजिष्यंते कदा कराः // 35 // एता यदि प्रिया मे स्यु- || रितरेण सुखेन किं // अथ नो चेदिमा मे स्यु-रितरेण सुखेन किं // 6 // तत्प्रेष्याशु निज: . चरित्रं प्रेष्या-नहमानाययामि ताः // परं पराकमधरे / परेषां दोजकारिणि // 7 // दिव्यरूपे | देवदिन्ने / तासां भर्तरि जीवति // न कश्चिदपि ता बाला / चलादादातुमीश्वरः // 7 // अतुबप्रतिनः को वा। मणिमुबेतुमिवति // पन्नगे स्फारफूत्कारे / क्रूराकारेऽथ जाग्रति ॥ए॥ जयंकरे शूकरे वा / तदंष्ट्रां हरिणेश्वरे // सटाबटां स्फुटामेव / व्याले वा दशनावली // // // तत्तं व्यापाद्य सद्योऽहं / पूरये खमनीषितं // परं प्रकटमेवामुं / निहंतुं कोऽपि नेश्वरः // 1 // रचयित्वा प्रपंचं त--पंचत्वं प्रापयाम्यमुं // एवं विचिंतयन् राजा। तस्थौ दुःस्थितमानसः // 2 // लब्धोपायः समुत्थाय / देवदिनादिसंगतः // निर्गत्य नगरात्प्रापक्रमानीरधिसन्निधौ // 3 // क्रीमंस्तत्र तटेऽकस्मा-न्मुक्ताहारं मनोहरं // मुक्तवान् कारनीरांत-मार्यया विचखाद च // 4 // हा हारो मे मनोहारी / पतितोंबुधिमंतरा // न प्रा|| णान् धर्तुमी शोऽह-माहारमिव तं विना // 5 // हृदयाल्पतितो हारः।प्रहार व चालगत् // || EP.AC.Gunratyasuri M.S. . Jun.Gun Aaradhak Trust