________________ ते। बुद्धिसागरमंत्रिणी // सुकरं वदतस्तेऽदो / उकरं तु नविष्यति // 20 // द्विमुख| स्वास्य भूपस्य / तस्मिन्नत्र समागते // एवं वदन् नर्सितोऽन्यै-जनैर्दूतः स निर्ययौ // // 1 // प्रद्योतभूपस्य / स आगत्य न्यवेदयत् // द्विगुणीकृत्य वृत्तांतं / प्रकोपमुददीपयत् // 2 // अथो विजययात्रायै / प्रतस्थे नरनायकः // पुर्यां प्रयाणढक्कायां / वादितायां मुहुर्मुहुः // 3 // वेगवंतोऽनिलसमा / गरीयांसो गिरीजवत् // गजा अनिल गिर्याद्या / हिलकाः प्रा. चलस्ततः // 4 // निर्महारथैर्युक्ता / महांतोऽथ रथोत्तमाः // जाता दिलदसंख्याकाः / प्रद्योतेस्यानुगासिनः // 5 // पंचाशवक्षसंख्याका / अश्वा विश्वाधिपानुगाः // अजूवन भूरितेजस्का / उच्चैरुच्चैःश्रवासमाः // 7 // संग्रामाग्रेसराः साराः / खजखेटकपाणयः // पदातयोऽग्रगास्तस्य / बभूवुः सप्तकोटयः // ए // एवं स चतुरंगेण / बलेन कलितोऽचलत् // उद्नांत इव पाथोधिरचलामपि चालयन् // 10 // अपरा अपि भूपाल-श्रेण्यः सबलवाईनाः॥प्रयोतसैन्यमाजग्मु-निम्नगा श्व सागरं // 11 // संधौ पंचालदेशस्य / भूपालेऽस्मिन्नुपस्थिते // संनयासह्यतेजस्कों / हिमुखोऽनिमुखं ययौ // 15 // गर्जति रणतर्याणि / से PP.AC.Gunratnasuri.M.S. Jun Gun Aaradhak Trust