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________________ धर्मः / बिंबस्स तो पुरन // 15 // बहुविदपकनाणं / ठवणा वरवत्थुगंधपुडियाणं // वरवंजणाण य तहा। जाफलाणं च सविसेसं // 15 // सागिख्खूवरसोलग-खंडाईणं च रोसहीणं च / / संपुन्नबलीय तहा / ठवणं पुरज जिणिदस्स // 16 // घयगुडदीवो सुकुमा-रियाजुन चनजवारया दिसिसु // | बिपुर ठवेजा / पूयाण बलिं तन देजा // 17 // धारत्तियमंगलदीव-यं च उत्तारिऊण जिणनाहं // वंदेऊ हि सासणदेव-याए जस्सग्गथुझ्दाणं // 17 // अह जिणपंचंगेसु / गवे. | गुरुथिरीकरणमंतं // वारा न तिन्नि पंच व / सत्तव अच्चतमपमत्तो // 15 // मयणहले आरो व। अहिवासणमंतनासमवि कुण॥ कायश् य तयं विंबं / सजियंव जहा फुलं हो॥२०॥ | एवमनिवासियं तं / बिंब गएका सदसवण-॥ चंदणमुजडेणं / तदुवरि पुष्फा विखिविज्जा। | // 21 // हावेज सत्तधनेण / तयणु जीवंत जनयपकाहिं // नारीहिं चनहिं समलं-कियाहिं | जीवंतनाहाहिं // // पमिपुत्रचत्तसुत्तेण / वेढणं वनगुणं च काऊणं // जमिणणं कारेका / तुमहिं हिरन्नदाणजुयं // 23 // तो वंदेका देवे / पश्छदेवीए काननस्सगं // दिज्ज थुईतीए | चिय / ठवेज्ज पुरन य घयपत्तं / / 24 // सोवन्नवट्टियाए / कुडा.महुसकराहिं नरियाए // कण Jun Gun Aaradhak Trust P.P.AC.Gunratnasuri M.S.
SR No.036436
Book TitleDharmratna Karanda Tika Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorVardhamansuri
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1915
Total Pages404
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size22 MB
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