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________________ धान- पारेने बालचापलं // कुमारान्यामजानद्यां / वाजिवारणकीलिकां // 25 // श्यता वियता यां सार्थ | तौ / कालेन स्वयमेव तौ // बालौ नविष्यतो हंत / क्षुत्तृट्पीमार्दितौ मृतौ // 26 // पृछतः सुत योः शुहिं / राझो दास्ये किमुत्तरं // जपतस्थावनर्थोऽयं / मम प्राणवधावधिः // 27 // जनान६५२ नादुदंतेऽस्मिन् / झाते मुक्तकृपो नृपः // कोकासमादिशद्दध्यं / का मैत्री ऋतुजा सह // 20 // द. धानाशुरुवात्सल्यं / राजपुत्रात्कुतोऽपि सः // नाविनं स्ववधं ज्ञात्वा / चक्रयंत्रं वितेनिवान् // 25 // ते काष्टमय घोडापर चडवू जणाव्यु. // 24 // त्यारे तेणे विचार्यु के अरेरे! ते घोमानने पा. aa वाळवानी खीली नहि जाणता एवा ते कुमारोए था केवु बालचापल कयु !! // 25 // बरे. रे! हवे ते बालको आकाशमां चालताथका अमुक वखते भुखतरसथी शुःखी थने पोतानीमेळेज मृत्यु पामशे. // 26 // हवे राजा ज्यारे मने था पुत्रोमाटे पूबशे त्यारे हुं शुं नत्तर था. पीश? था तो मारा प्राणोनो नाश थवाजेवो अनर्थ आवी पड्यो. // 27 // पनी लोकोना मुख थी ज्यारे या वृत्तांत जाण्युं त्यारे राजाए निर्दय थश्ने कोकासने मारी नाखवानो हकम कर्यो, | राजासाथेनी मित्राश् शा कामनी ? // 20 // गुरुपर प्रेम धरनारा कोश्क राजपुत्रपासेथी पोता. P.P.AC. Gunratnasuri M.s. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036433
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 04
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages204
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size17 MB
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