________________ धम्मि- स्यापि ते धातः / किमेतद्धालचापलं // 26 // अंगना रंगनाशय / प्रायेण पथिकेष्विति // कि. | मायतपथारूढ / न मां नाथ सहाग्रहीः // 7 // प्राणेऽन्योऽपि प्रियासीति / मिथ्या मामवदस्तदा | // प्राणानादाय मुक्त्वा मां / गतोऽसि कथमन्यया // 20 // जननी वीदय दुःखार्ता-मपि बाल| श्विखेल सः // परहर्षविषादेशु / बालका हि बहिर्मुखाः // 20 // मुंचन्नगलदत्तोथ / बाल्यं व्यक्तमना मनाक् // निपत्य पादयोर्मातुः / क्रंदत्या श्युवाच सः // 30 // तव वर्षासरःप्राये / नि. मेलवीने पोतेज तेने जे नांगी नाखो नो, एवी बालकजेवी चेष्टा शुं आपने योग्य ? // 26 // वळी हे नाथ! प्रायें करीने पंयीनने ( साथे रहेली ) स्त्रीनं तेनंना रंगने नाश करनारी कहे. वाय , परंतु आप तो ज्यारे लांबी मुसाफरीये चाव्या तो पनी मने साथे शामाटे न ले गया? // 27 // तुं मने प्राणोथी पण प्रिय गे एम मने ते वखते फोकटज आप कहेता हता, जो एम न होत तो मने छोमीने वथा प्राणो लेख्ने श्राप शामाटे चाल्या गया ? // 2 // एवी रीते पो. तानी माताने दुःखी जोश्ने पण ते बाळक तो गम्मत करवा लाग्यो, केमके परना ढर्ष अथवा शोकमाटे बालको बेदरकार रहे . // 20 // पनी ते अगलदत्त बाव्यपणुं वीत्याबाद जरा समज .PP.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust