________________ धमि विलापान कृपयेरितः // एत्य स्वपाणिस्पर्शन / तस्य जायामजीवयत // 4 // गते खेटे समं वध्वा | / स विवेशामरालयं / / चचाल चामये प्रोक्तो / ध्वांताकुलितया तया // 5 // मज्जातायं च तत्रा. | मि-समुझमुदघाटयत् // प्रकाशे प्रसृते वर्षों-स्तत्प्रिया निरैदत // 6 // नारीहक्कार्मणेनास्य / 456 रूपेण शुचिताशया // सौम्य कोऽसि त्वमत्रेति / सा मृदृक्त्यामुमालपत् // 7 // व्रातृवैरात्तव धवं / हत्वा वं गृह्यसे मया // इत्यस्य वचसा तस्याः। कर्णयोरमृतायितं // 7 // सावादीदेव यद्येवं / त्यां भावी पोताना हाथना स्पर्शयी तेनी स्त्रीने जीवाडी. // 4 // पछी ते विद्याधर गयावाद स्त्रीसहित ते सुजट देवमंदिरमा गयो, परंतु अंधकारथी व्याकुल थयेली ते स्त्रीना कहेवाथी ते अ. मि लेवामाटे चाख्यो. // 5 // एवामां था मारा जाइए अमिनो डाबडो एटले चोरफानस नघा. ड्युं, एटले अमिनो प्रकाश फेलावाथी ते सुभटनी स्त्रीए था मारा नाश्ने जोयो. // 6 // स्वीनी थांखोने कामणसमान एवा तेना रूपथी मोहित थयेली ते स्त्रीए तेने कोमळ वचनथी बोलाव्यो के हे सौम्य ! तुं वळी यहीं कोण ? // 7 // मारा नाश्ना वेस्थी तारा भर्तारने मारीने हं तने ले जश्श, एवी रीतनुं तेनुं वचन तेणीने पोताना कानमां अमृतसरखं लाग्यु.॥ // प P.P.AC.Gunratnasuri M.S. Jun Gun Aaradhak Trust