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________________ धम्मि- स्त्वत्समाध्यर्थ / स्थास्यामि कतिचित्पुनः / / 33 // अथो तरुतले मुक्त्वा / क्वचित्तां नृपर्नदनः / कर्तुं जोजनसामग्रीं / प्रविवेश पुरांतरा // 34 // द्यूतेन कितवान जित्वा / प्राप्य किंचन कांचनं / / तेन कांदविकात् खम-मंझकाद्यमुपाददे / / 35 // जक्तपूर्णशरावोऽय / नगरान्निरयन्नसौ / / केषां | 332 प्रविशतां ना-दिष्टश्रीलाजसूचकः // 36 / / गत्वा तरुनले लक्ष्य-दैपालभूः प्रियां // भो. जयित्वा ततोऽभुंक्त / स्वात्मनोऽपि प्रिंया हि सा // 37 // .. ने एम मरण थशे तो विधाताए निधान देखामीने पाडं लेश लीघा जेवू थशे. // 32 // तो प. ण हे प्रिये ! हमणां जो तने दीदा गमती नहि होय तो तने खुश करवामाटे हुँ केटलाक वर्षो सुधी ( गृहस्थपणामी ) रहीश. // 33 // पड़ी ते गुणवर्मा कुमार तेणीने कोश्क वृतानीचे मुकी. ने नोजनंनी सामग्रीमाटे नगरनी अंदर गयो. // 34 // त्यां जुगारवडे जुगारीनने जीती कईक सुवर्ण मेलवी तेवडे कंदोपासेथी तेणे मालपुडायादिक लीधुं. // 35 // भोजनधी नरेलां पा. वाळी ते नगरमांथी निकलतोयको कोने वांबित लगीनो लान सूचवनारो न थयो? // 36 // | पनी ते राजपुत्रे वृदानीचे जश्ने विविध योजनथी पोतानी प्रियाने जमाड्याबाद पोते जोजन | P.P.AC. Gunratnasuri Ms. Jun Gun Aaradhak Trust
SR No.036431
Book TitleDhamil Charitra Bhashantar Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorShravak Hiralal Hansraj
PublisherShravak Hiralal Hansraj
Publication Year1914
Total Pages176
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari
File Size15 MB
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