________________ बाहुबली और उनकी प्रतिमा की प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई कुछ प्रसिद्ध महिलाएं THE FAMOUS LADIES CONNECTED WITH BAHUBALI AND HIS STATUE 1. Brahmi: She was the sister of Emperor Bharat and half-sister of Bahubali. She devoted her entire life developing scripts which later on became known as Brahmi scripts. Another version of this script is known as Tamil Brahmi script. We see them in archaleogical inscriptions even in Mohenjo-daro. She decided not to get married and became the head of nuns in Adinath assembly. 2. Kalala Devi, mother of Chavundaraya: Her perseverance led to the creation of this statue. She renounced milk for 12 years upto the successful completion of the first Mahamastakabhishek. She inspired the mother of the sculptor Chagad too. (1) ब्राह्मी : वह सम्राट भरत की बहन और बाहुबली की सौतेली बहन थीं। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन लिपियों के विकास में लगा दिया जो बाद में ब्राह्मी लिपि के नाम से विख्यात हुई। इसी लिपि का एक अन्य रूपान्तर तमिल ब्राह्मी लिपि के नाम से जाना गया। पुरातत्व के शिलालेखों में हम इन्हीं लिपियों का प्रयोग देखते हैं, यहां तक कि मोहनजोदड़ो में भी। ब्राह्मी ने विवाह न करने का निश्चय किया और आदिनाथ जी के संघ में वह साध्वियों की प्रमुख बन गईं। (2) कलालादेवी : चामुण्डराय की माता थीं। उनके निरन्तर उद्योग के परिणाम स्वरूप बाहुबली की प्रतिमा का निर्माण हुआ। उन्होंने 12 वर्षों तक, प्रतिमा के प्रथम महामस्तकाभिषेक के सफलतापूर्वक पूरा होने तक, दूध का त्याग किया। उन्होंने शिल्पकार चागद की माता को भी प्रभावित और प्रेरित किया। (3) दान चिन्तामणि अतिमाब्बे (950-1020 ई.): एक युवा किन्तु धनी विधवा थीं जिन्हें कर्नाटक की माता के रूप में सम्मानित किया गया है। वह श्री धवला के प्रचार-प्रसार के कार्य के लिए प्रसिद्ध हैं, जो कि पवित्र जैन शास्त्र "षट्खण्डागम्' की विस्तृत टीका है। इसके विराट् आकार का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि इसमें 72000 श्लोक हैं। अतिमाब्बे ने इस ग्रंथ की एक प्रति के बदले में उपहार-स्वरूप एक स्वर्ण-स्मारिका भेंट की थी जिस पर शान्ति नाथ जी की आकृति अंकित थी। डॉ. हम्पा नागराजैया के अनुसार इन्होंने विभिन्न स्थानों पर अनेकानेक जैन प्रतिमाओं की स्थापना करवाई थी। 3. Danachintamani Atimabbey (950-1020 A.D.) was a young but rich widow hailed as the mother of Karnataka. She was famous for her service to the propagation of Sri Dhavala which is a large commentary on the sacred Jain scripture called Shatkhandagam. Its dimension is equivalent to 72000 stanzas. She donated one gold icon engraved with the image of Shri Shantinath as a token gift for each copy of this manuscript. She seemed to have installed a large number of Jaina images according to Dr Hampa Nagarajaiah. (301