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________________ Tदैनिक लोक लक्ष्य उज्जैन, दिनांक, बुधवार 27 फरवरी 2019 ladakels arelimal.om मंदिर के प्राचीन इतिहास को मिटाया, नई प्रतिमाएं लगाकर समाज से किया धोखा तपणडपारसमितिकैपतिनिधि केरूपमॅपधारे प्राचार्यश्री मटकारस्तीकसने स्वप्रतावसतिष उपारिन अतिपार्शवनावमदिरमॅटरदराजनाप्रपनेउप्राधान काउल्लंघन करनेसेदानवतास्वरिष्ठअचर्यनाखुश, तपागच्छापरंपरा:मंदिरपरजीर्णोद्धार के नाममनमानीसेयजाअसंतोष, खतरगळगडाके प्राचार्यनेकी आस्थाकोपहुचाईटेस उज्जै न। किसी साधु-संत आदी के नाम के शिलालेख नहीं लगेंगे साथ ही मूल अति प्राचीन प्रभू व आसपास की प्रतिमाएं मल स्थान पर ही रहेगी। लेकिन प्रतिष्ठा अवंतिपार्श्वनाथ दौरान इन प्रावधानों के साथ अन्य अनिवार्य तीर्थ नियमों का खला मंदिर जो देश के उल्लंघन हुआ है। खुद मंदिर ट्रस्ट ने ही अपनी प्रोसिडिंग को नहीं माना विख्यात 108 ओर खतरगच्छ समुदाय के आचार्य जिन मणीप्रभ सागर सूरी के इशारें पार्श्वनाथ मंदिर में तीर्थ की प्राचीनता को मिटा दिया। जबकी वरिष्ठ जैनाचार्य द्वारा ट्रस्ट में विद्यमान है। से पारित प्रस्ताव व तीर्थ नियमों के पालन की लिखित सूचना पूर्व में यहां जीर्णोद्धार ही दी जा चुकी थीं। इस धोखाधड़ी को लेकर तपागच्छ प्रवर समिति के व पुनः प्रतिष्ठा आचार्यों में रोष है और वे अब वे श्रीसंघ के जरीए वैधानिक कार्रवाई दौरान हुए कार्यों की तैयारी कर रहे है। ने श्वेतांबर जैन जो नियम बनाकर दान लिया, उसे बाद में तोड़ासमाज में विवाद अवंतिपार्श्वनाथ ट्रस्ट ने मंदिर जीर्णोद्धार को लेकर 2001 में प्रस्ताव की स्थिति पैदा पारित कर 5 बिंदु तय किए थे। इसी आधार पर देश के नामी ट्रस्ट व कर दी है। दानदाताओं से मंदिर निर्माण में राशि ली गई। ये सब कुछ होने व भरोसे मूलनायक प्रभू में लेने के बाद प्रतिष्ठा से कुछ माह पहले तीन प्रतिमाएं हटाकर के आसपास की अन्यत्र विराजित की। ये प्रतिमाएं तपागच्छ संतों द्वारा प्रतिष्ठित थीं। तीन प्रतिमाओं साथ ही नइ प्रतिमा नहीं लगाने का निर्णय हुआ था, जिसका खुला का उत्पाथन व इसके बाद अवंति पाश्वनाथ के प्राचीन उल्लंघन पर 20 से अधिक प्रतिमाएं व उनके नीचे नाम लिखकर इतिहास को धूमिल करते हए यहां नई प्रतिमाएं व चरण पादुका स्थापित कर दी गई। कल्याण मंदिर की 44देहरियों पर 44 चरण लगाने सहित अन्य कई मामलों को लेकर आचार्य श्री पादुकाएं लगाकर सभी पर खतरगच्छ के आचार्य ने अपने व हेमचंद्रसागर सूरीश्वर बंधु बलेडी, आचार्य विश्व रत्न सागर सूरी, श्रावकों के नाम अंकित करा दिए।मूर्ति ओर पादुकाओं के शिला ज्योतिष सम्राट आचार्य श्री ऋषभ चंद्र सुरीश्वरजी ने कड़ा लेख में लिखा गया +खतरगच्छ सहस्त्राब्दी’ गौरव वर्ष वाक्य से एतराज लिया है। तपागच्छीय प्रवर समिति के जरीए मंदिर जिनशाशन के प्रमाणित इतिहास के साथ भी छेड़खानी की गई व्यवस्थापक अवंतिपार्श्वनाथ तीर्थ मारवाड़ी समाज ट्रस्ट को है जबकी मंदिर परिसर में साधु-संत के नाम लिखने की मनाही पहले ही आगाह किया गया था, लेकिन फिर भी एनवक्त पर ट्रस्ट ने खुद तय की थी। जो नियम बनाकर ट्रस्ट ने देशभर के प्रतिष्ठा समिति व टस्ट प्रबंधन ने मनमानी की। लिहाजा अब ये दानदाता व स्थानीय समाजजनों ने जो राशि ली उसमें धोखाधड़ी मामला उन दानदाता ट्रस्टों तक पहुंचा है, जहां से मंदिर की गई। प्रतिष्ठा पूर्व ही मालवा तपागच्छ मुर्तिपूजक श्रीसंघ ने जीर्णोद्धार के करोड़ों रुपए दिए गए है। अपने आपत्ति पत्र दे दिए थे। जिला कलेक्टर से भी इसकी प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने आए आचार्य हेमचंद्र सागरसूरी ने शिकायत की जा चुकी थी, जिस पर एडीएम ने मौका मुआयना इन मनमानियों को लेकर अपनी नाराजगी प्रकट की है। उनके अनुसार भी किया था। प्रतिष्ठा महोत्सव में तपागच्छ के वरिष्ठ आचार्यों के साथ श्वेतांबर जैन मूर्तिपूजक परंपरा के दो गच्छ, एक तपागच्छाव दूसरा समान एवम व्यवस्था को लेकर जो अनुचित ओर अयोग्य व्यवहार खतरगच्छ। अवंतिपार्श्वनाथ मंदिर का इतिहास तपागच्छ परंपरा के साथ हुआ , उससे पूरा जैन संघ आहत है। बावजूद मनमानी की जाकर जड़ा है। 21 जनवरी 2001 में मंदिर ट्रस्ट ने प्रस्ताव पारित किए थे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई। उक्त जानकारी मालवा महासंघ की जीर्णोद्धार दौरान मंदिर परिसर में कोई नई प्रतिमाएं नहीं लगेगी, के विधि सलाहकार महेंद्र सुंदेचा एडवोकेट ने दी। DOORAKOOOOOOOL R8888888888888| 64 1888888888888888888 0000000000000000000 600000000000000
SR No.035326
Book TitleKhartargacchacharya Jinmaniprabhsuriji Ko Pratyuttar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTejas Shah, Harsh Shah, Tap Shah
PublisherShwetambar Murtipujak Tapagaccha Yuvak Parishad
Publication Year
Total Pages78
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size50 MB
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