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________________ 3. तपागच्छीय श्रीसंघ और पूर्व में गच्छाधिपति आचार्य गगरांत के प्रास्त्रीय अनुसार प्रतिष्ठित विराजमान प्रतिमाजी के साथ छेड़छाड़ की गई है, जिसके विसता श्रीसंथ के द्वारा तपागच्छीय गच्छाधिपति आचार्य भगवंतों, साधु-साध्वी भगवंतों के समक्ष जानकारी दी गई। इसके बाद तत्काल प्रभाव से एक मीटिंग का आयोजन दिनांक फरवरी 2019 रविवार को श्री ऋषभदेव छगनीराम पेढ़ी खाराकुआं पर हुआ। उसमें आचार्य भगवंत ओर श्रीसंघ ने प्रस्ताव पास कर ट्रस्ट मंडल को विरोध की जानकारी देते हुए फरवरी 2019 तक की समयावधि देकर विचार करने के लिए पर्याप्त समय दिया, किंतु आज दिनांक तक कोई ठोस निर्णय या पहल नहीं हुई। 4. ट्रस्ट मंडल हठधर्मिता, असहयोग के चलते श्रीसंघ की भावनाओं को दरकिनार करते हुए मनमाने गुपचुप तरीके से प्रतिष्ठा प्रसंग को संपादन करना चाहते है। अतः श्रीमान के समक्ष प्रस्तुत उक्त बिंदूओं की गहनता से तत्काल जांच कर तत्काल प्रभाव से दोषीयों के विरूद्ध कानूनी कार्यवाही की जाए और प्राचीन स्वरूप वापिस आ सके। किसी भी प्रकार का परिवर्तन अस्वीकार है। संलग्न छायाप्रति:1. ट्रस्ट मंडल की मीटिंग में सर्वानुमति से पारित प्रस्ताव की प्रति। 2. दैनिक अखबारों में प्रकाशित जानकारी की प्रति। 3. तपागच्छीय आचार्य एवं श्रीसंघ का विरोध पत्र। 4. प्राचीनतम इतिहास की प्रतिलिपी। संजय कोठारी 01, गहू रोड रतलाम संपर्क:- 98260-30583 90000000pmpomp9Q9x 00000000000000000000 omoODOOOOOOOOOO 000000000000
SR No.035326
Book TitleKhartargacchacharya Jinmaniprabhsuriji Ko Pratyuttar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTejas Shah, Harsh Shah, Tap Shah
PublisherShwetambar Murtipujak Tapagaccha Yuvak Parishad
Publication Year
Total Pages78
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size50 MB
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