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________________ श्री अवन्ति पाश्र्वनाथ तीर्थ जैन श्वेताम्बर मर्तिपूजकमारवाड़ी समाज टस्ट ति..तिनामीजनिकीतापातासाफाकालमा ज-0734-25555E RH (म.प्र.) ट्रस्ट के अंतर्गत मा अति पानाय तीर्थ कालीगेट होन-0734-2585854 की शांतिनाथजी मंदिर मिटा सराफा होन-2555553 की अजितनाथजी मंदिर टा सराफा 4. यदि आपनी कासार मे पधारनामा, तो आपत्री को यह विदित जागा किमी अचान्त पार्वनाम की प्रतिमा जीये नागरे स्थित हाल म बनी एक वादका पर विराजमान थी। उस वेदिका पर चार प्रतिमाजी विराजित बामय नइच के अवन्ति पावनत्यप्र केबारी ओर उसी समान गादी पर नइच के मोती पार्शनाय प्रण की प्रतिमा, प्रभु के दावी ओर उसी समान मादी पर 34इंच के आदिनाथ एवं आदिनाथ प्रभु के पीछे 10 इच कनेमिनाथ की प्रतिमा विराजित थी।ये प्रतिमाएं एकहीतरी विराजमान थी। . नेमिनाथ प्रभु की प्रतिमा पी० होने के कारण दृष्टिगोचर भी नहीं होती थी। साथ ही गोटी पार्श्वनाथ प्रम की प्रतिमा मूलनायक से ची होने व आदिनाथ प्रभु की प्रतिमा नीचे होने के कारण संपूर्ण रूप से दृष्टि दोष था। तीनों ही प्रतिमा एक दूसरे से प्रायः सटी हुई थी। बीच में मात्र 4-4ईच की दूरी थी। पूज्यश्री ने फरमाया-वर्तमान में परमात्मा रिद अवरचा है। परिकार से परमात्मा की तीर्थ की शोभा में अतिशय गृद्धि होगी, अतः परिकर स्थापित करना चाहिये। 7. पूज्य आचार्यश्री का पवारना हुआ तब ट्रस्ट मंडल के सामने फरमाया कि दृष्टि दोष का निवारण अनिवार्य है। इसके लिये मूलनायक के सिवाय अन्य तीन प्रतिमाओं का उत्थापन करना चाहिए। साथ ही नेमिनाथ प्रमु की प्रतिमा को व्यवस्थित रूप से विराजमान करना चाहिए। ट्रस्ट मंडल का विचार रहा कि चकि साधारण सभा में उत्थापन न करने का निर्णय लिया। गया था, अतः उत्थापन के निर्णय पर पुनर्विचार भी साधारण सभा नही होगा। 8. हमने साधारण सभा की बैठक की। उसमें उत्थापन का प्रस्ताव रखा गया। उस सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने कहा-तीन दिन बाद पुनः बैठक का आयोजन हो। सदस्यों के इस प्रस्ताव पर तीन दिन बाद बैठक बुलाई गई। उपस्थित सभी सदस्यों के विचार-विमर्श के उपरात सर्वसम्मति से यह निर्णय किया गया कि मूलनायक के सिवाय अन्य तीन प्रतिमाओं का उत्थापन करवाया जाये। शुभ मुहूर्त में श्रीसंघ की उपस्थिति में ता 10 दिसम्बर 2018 को उत्थापन विधान करवाया गया। आदिश्वरजी तीर्थ एवं सिद्धाचल पत्र द्रबाहुमार्ण,बड़नगर रोड़ स्वरतरगच्छाचार्य जनदत्तकुशलसूरिदादावाड़ी टिा सराफा चिरणापादुका छत्री लिगंगा | जिनकुशलसूरि दादावाड़ी घण्टाकर्ण महावीर मंदिर नीगेट 900090009090920px 6666666666666666660 DOOOOOOOOOOOOOK Gooooooooo
SR No.035326
Book TitleKhartargacchacharya Jinmaniprabhsuriji Ko Pratyuttar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorTejas Shah, Harsh Shah, Tap Shah
PublisherShwetambar Murtipujak Tapagaccha Yuvak Parishad
Publication Year
Total Pages78
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size50 MB
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