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________________ कल्पसूत्र उतरा, नीचे उतरकर उत्तम वैडूर्य, वरिष्ठ, अरिष्ट अञ्जन आदि रत्नों से युक्त, कुशल कारीगरों द्वारा निर्मित चमचमाते हुए मणि- मुक्ताओं से मण्डित पादुका ( खड़ाऊ - जूतों) को उतारकर, दुपट्टे से उत्तरासन करके (मुंह की यतना करके) अंजिल से मुकुलित अग्र हाथवाला वह इन्द्र तीर्थंकर के सम्मुख सातआठ कदम आगे चलकर दाहिने घुटने को ऊंचा करके, बांये घुटने को भूमि पर रखकर तीन बार मस्तिष्क को पृथ्वी पर लगाकर किञ्चित् ऊँचा हाता है और सीधा होकर कड़े और त्रुटिन से युक्त भुजा को संकुचित करता है, दोनों भुजाओं को संकुचित कर दसनाखून एक दूसरे से संयुक्त रहे इस प्रकार सम्मिलित करके मस्तिष्क पर अंजलि करता हुआ इस प्रकार बोला RY मूल :-- नमोत्थूणं अरहंताणं भगवंताणं ॥ १॥ आइगराणं तित्थगराणं सयंसंबुद्धाणं ॥ २॥ पुरिसुत्तमाणं पुरिससीहाणं पुरिसवरपुंडरियाणं पुरिसवरगंधहत्थीणं ||३|| लोगुत्तमाणं लोगनाहाणं लोगहियाणं लोगपईवाणं लोगपज्जोयगराणं ॥४॥ अभयदयाणं चक्खुदयाणं मग्गदयाणं सरणदयाणं जीवदयाणं बोहिदयाणं ॥ ५ ॥ धम्मदयाणं धम्मदेसयाणं धम्मनायगाणं धम्मसारहीणं धम्मवरचाउरंत कवट्टीणं ॥ ६॥ दीवो ताणं सरणं गई पहट्ठा, (णं) अप्पडि हयवरना णदंसणधराणं वियदृछउमाणं ||७|| जिणाणं जावयाणं तिन्नाणं तारयाणं बुद्धाणं बोहयाणं मुत्ताणं मोयगाणं ॥ ८॥ सव्वन्नणं सव्वदरिसीणं सिवमयलमरुयमणंतमक्खयमव्वावाहमपुणरावित्ति सिद्धिगहनामधेयं ठाणं संपत्ताणं नमो जिणाणं जियभयाणं ॥ ६ ॥ नमोत्थु णं समणस्स भगवओ महावीरस्म आदिगरस्स चरिमतित्थयरस्स पुव्वतित्थयरनिद्दिट्ठस्स जाव संपाविउकामस्स, वंदामि णं भगवंतं तत्थगयं इहगये पासउ मे भगवं तत्थगए
SR No.035318
Book TitleKalpasutra
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDevendramuni
PublisherAmar Jain Agam Shodh Samsthan
Publication Year1968
Total Pages474
LanguageSanskrit, Hindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size18 MB
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