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________________ ummmmmmm ( २ ) ऐसे अंधकार मय भयंकरगड्ढ़ेमें, जहां सूर्यकी किरण प्रवेश नहीं कर सकती थी पटकदिया और बातकी बातमें दृष्टिसे लुप्त होगया । ___ अतिशय वलवान पुरुषोंको भी दुर्वल मनुष्योंके साथ कदापि वैर नहीं करना चाहिये क्योंकि दुर्बलके साथ भी किया हुवा वैर मनुष्योंको इससंसारमें अनेक प्रकारका अचिंतनीय कष्ट देता है। ____ अहा! दुखोंका समूह कैसा आश्चर्यका करनेवालाहै । देखो ! कहांतो मगधदेशका स्वामी राजा उपश्रोणिक ? और कहां अनेकप्रकारके भयंकर दुःखोंका देनेवाला महानबन ? तथा कहां अतिशय मनोहर राजग्रहनगर? कहां अंधकार मय भयंकर गड्ढ़ा ? क्या कियाजाय वरैका फलही ऐसाहै, इस लिये उत्तमपुरुषोंको चाहिये कि वे उभयलोक दुःख देनेवाले इस परमवैरी वैर विरोधको अपने पास कदापि न फटकने दें। ___ जब लोगोंने महाराज उपश्रेणिकके लापता होनेका समाचार सुना तो सेनामें, देशमें, अनेक जनोंसे सर्वथा पूर्ण राजग्रह नगरमें, एवं अन्यान्यनगरोमें भी शोक और चिंता छागई और हाहाकार मच गया । रनवांसकी समस्त रानियां यह समाचार सुनते ही मुर्छित होगई और महाराजके वियोगमें एकदम करुणा जनक रोदन करने लगी । जितने केशविन्यास हार आदिक शृंगार थे उन सबको उन्होंने तोड़कर Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035265
Book TitleShrenik Charitra Bhasha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGajadhar Nyayashastri
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1914
Total Pages402
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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