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________________ ( १८९ ) शीघ्र ही उन छाछमिश्रित टुकड़ोको खागये । एवं भोजनके अन्तमें रानी द्वारादिये तांबूल इलायची आदि चीजोंको खाकर और सबके सव रानीके पास आकर इसप्रकार उसै उपदेश देने लगे___सुंदरि ? देख तेरी प्रार्थनासे हम सबोंने राजमंदिरमें आकर भोजन किया है। अब तू शीघ्र ही बौद्धधर्मको धारणकर । शीव ही अपनी आत्मा बौद्धधर्मकी कृपासे पवित्र वना । अव तुझै जैनधर्मसे सर्वथा संबंध छोड़ देना चाहिये। ____ बौद्ध गुरुओंका ऐसा उपदेश सुन रानीने विनयसे उत्तर दिया श्रीगुरुओ ! आप अपने अपने स्थानोंपर जाकर विराजे । मैं आपके यहां आऊंगी। और वहीं पर बौद्धधर्म धारण करूंगी। इस विषयमें आप जराभी संदेह न करै । __रानी चेलनाके ऐसे विनयवचन सुन वे सवगुरु अति प्रसन्न हुवे । और अपने अपने मठोंको चलदिये । जिससमय वे दरवाजेपर आये । और ज्योंही उन्होंने अपने वाये पैरके जूतोंको न देखा वे एकदम घबड़ागये । आपसमें एक दूसरे का मुंह ताकने लगे । एवं कुछ समय इधर उधर अन्वेषण कर वे शीघू ही रानी के पास आये। और रानीसे जूतोंकी वाबत कहा । एवं रानीको उपटने भी लगे कि तुझे गुरुओंके साथ हंसी नहीं करनी चाहिये । बौद्ध गुरुओंका यह चरित्र देख रानी हसने लगी। उसने Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035265
Book TitleShrenik Charitra Bhasha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGajadhar Nyayashastri
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1914
Total Pages402
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
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