SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 181
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ ( १६० ) कोंन बड़ी वात थी ?। ज्योंही उसने ज्येष्ठाके वचन सुने । चट अपने सामने पट रखकर हाथमे लेखनी लेली । और पद्मावती देवीके प्रसादसे जैसा कुमारी चेलनाका रूप था । तथा जो जो उसके गुप्त अंगोंमें तिल आदि चिन्ह थे वे ज्योंके त्यों चित्र में आगये । तथा चौखटा वगेरहसे उस चित्रको अति मनोहर वनाकर, शीघ्रही उसने ज्येष्ठाको दे दिया। कुमारी चेलनाके चित्रको लेकर प्रथम तो ज्येष्ठा अति प्रसन्न हुई । कितु ज्योंही उसकी दृष्टि गुप्तस्थानों में रहे हुये तिल आदि चिन्हों पर पड़ी । वह एक दम आश्चर्य सागर में डूब गई । अव मारामार उसके मनमें ये सकल्प विकल्प उठने लगे । कि बाह्य अंगोंके चिन्होंकी तो वात दूसरी है।इस चित्रकारको गुह्यअंगोंके चिन्होंको कैसे पता लग गया ? न मालूम यह चित्रकार कैसा है ? इधर ज्येष्ठातो ऐसा विचार कर रही थी उधर किसी जासूसको भी इस वातका पता लग गषा । वह शीघ्र ही भगता भगता महाराजके पास गया । और चित्रकारकी सारी बातें महाराज चेटकसे जा पोई । ___ जासूसके मुखसें यह वृत्तांत सुन राजा चेटक अति कुपित होगये । कुछ समय पहिले जो राजा चेटक चित्रकार भरतको उत्तम समझते थे । वही विचारा चित्रकार जासूसके बचनोंसे उन्हे काला भुंजग सरीखा जान पड़ने लगा । वे Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035265
Book TitleShrenik Charitra Bhasha
Original Sutra AuthorN/A
AuthorGajadhar Nyayashastri
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1914
Total Pages402
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size23 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy