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________________ अन्य राजा और जैन संघ । काष्ठानगरमें एक समय और संभवतः उक्त नागवंशके राज्य कालमें ही जैनधर्मका प्रभाव विशेष था । वहांका जैनसंघ आज भी भारतके विभिन्न स्थानोंमें फैला हुआ है । यह भी संभव है कि उक्त नागवंशके राजा जैन संघके पोषक हों । संभवतः इसी कारण वहांका संघ खूब फूला फला था । ___ मथुरासे उत्तर पूर्वकी ओर पांचाल राज्य था। उसकी राज ___धानी प्राचीन कालसे कांपिल्य थी । जैनोंके पांचाल राज्यमें जैनधर्म तेरहवें तीर्थङ्कर श्री विमलनाथजीका जन्मस्थान व दानवीर भवड़ । और तपोभूमि भी यही नगर था। विक्रमकी पहली शताब्दिमें यहांपर तपन नामक राजा राज्य करता था। उसी समय भावड़ नामक एक धर्मात्मा जैन सेठ यहां रहते थे। यह एक प्रतिष्ठित धनी व्यापारी थे । इनका व्यापार देश-विदेशसे होता था । जहाजोंमें माल भेजा जाता था। एक दफे दुर्भाग्यसे इनके सारे जहाज समुद्रमें डूब गये। इससे उनके व्यापारको बड़ा धक्का लगा। किन्तु वह धीरजसे व्यापार करते रहे । एक घोड़ीसे इनके भाग चमक गये । वहांके राजाने तीन लाख रु० में उस घोड़ीको भावड़से खरीद लिया था। उसके वछेड़को भावड़ने विक्रम राजाको भेट किया। राजाने प्रसन्न होकर उन्हें महुआ आदि कई ग्राम दिये । भावड़ उन ग्रामोंका नायक बन गया। उनकी भावला नामक स्त्रीसे उनको भवड़ नामक पुत्ररत्नकी प्राप्ति हुई। १८६७के लिखे हुए एक गुटके में काष्ठासंघकी रीतियां काष्टादि देशकी कहीं गई हैं (काष्ठासंघश्चिरंजीयात्क्रिया काष्ठादि देशकः) अतः काष्ठा नाम देश अपेक्षा ही है। Shree Sudharmaswami G nbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035244
Book TitleSankshipta Jain Itihas Part 02 Khand 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1934
Total Pages204
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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