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________________ ५६] संक्षिप्त जैन इतिहास। संक्षिप्त संवत्वार विवरण:सन् ईसवी पूर्व २२५ कलिंगमें चेदिवंश और दक्षिणमें सातवाहन राज्यका उदय । २०७ खारबेलका जन्म; १९२ खारवेलको युवराजपद प्राप्त हुआ; १८८ पुष्यमित्रका राज्यारोहण; १८३ खारवेलको राज्य-प्राप्ति; १८२ शातकर्णि प्रथम राज्य करते और खारवेलका आक्रमण; १७९ खारवेलका राष्ट्रिक व भोजक क्षत्रियोंपर विजय पाना; १७८ तनसुलिय–बाट नहरका राजधानीमें लाना; १७७ खारवेलने सम्राटपद ग्रहण किया; महाराजाभिषेक व राजसूय यज्ञ हुआ; १७६ संभवतः खारवेलको राजकुमारकी प्राप्ति; १७५ गोरथगिरिकी लड़ाई,दमेत्रिय (डिमिट्रियस)का मथुरा छोड़जाना। १७३ खारवेलका उतरापथपर आक्रमण; १७२ खारवेल द्वारा कलिंगमें जैन पूजाका सुधार; १७१ पुष्यमित्रकी पराजय; १७० खारवेलका कुमारी पर्वतपर व्रत उपवास करना और मंदिरादि बन वाना; जैन संघ एकत्र होना और जैन वांगमयका उद्धार कराना। (संभवतः शिलालेख भी इसी वर्ष में उत्कीर्ण कराया गया था।) १६९-१५२ संभवतः खारवेलका देहावसान हुआ। १५२ पुष्यमित्रकी मृत्यु ! Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035244
Book TitleSankshipta Jain Itihas Part 02 Khand 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1934
Total Pages204
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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