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________________ (१६) एइमे० या मेएइ० एन्शियेन्ट इन्डिया एजडिस्क्राइब्ड बाई मेगस्थनीज एण्ड ऐरियन'-(१८७७)। एइजै० एन इपीटोम ऑफ जैनीज्म-श्री पूर्णचन्द्र नाहर एम०ए०। एमिक्षदा०= एन्शियेन्ट मिड इंडियन क्षत्रिय ट्राइन्स ' डॉ० विमलाचरण ला (कलकत्ता)। ऐरि०=ऐशियाटिक रिसर्चेज-सर विलियम जोन्स (सन् १७९९ व १९०९)। एइ० एन्शियेन्ट इंडिया एजडिस्काइन्ड बाई स्ट्रैबो मैक किंडल (१८०१)। कजाइ० कनिंघम, जागरफी ऑफ एंशियेन्ट इंडिया-(कलकत्ता १९२४)। कलि०= ए हिस्ट्री ऑफ कनारीज लिट्रेचर । ई० पी० राइस (H. L. S. 1921 ). कसू० कल्पसूत्र मूल (श्वेताम्बरी आगम प्रन्थ)। काले० कारमाइकल लेक्वस डॉ० डी० आर० भाण्डारकार । कैहिइ० कैम्ब्रिज हिस्ट्री आफ इंडिया ऐन्शियेन्ट इंडिया, भा० १-रैपसन सा० (१९२२)। गुसापरि०-गुजराती साहित्य परिषद् रिपोर्ट-सातवीं । (भावनगर सं० १९८२)। गौबु०='गौतमबुद्ध' के. जे. सान्डर्स (H. L. S.)। चमभ०='चद्रराज भडारी कृत भगवान महावीर' । जवि मोसो० जनरल आफ दी बिहार एण्ड ओडीसा रिसच सोसाइटी'। जम्बू०=जम्बूकुमार चरित्र (सूरत वीराब्द २४४०)। Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035244
Book TitleSankshipta Jain Itihas Part 02 Khand 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorKamtaprasad Jain
PublisherMulchand Kisandas Kapadia
Publication Year1934
Total Pages204
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size3 MB
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