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________________ प्रश्नोत्तर त्यासीमो २५३ छेहल उ भव ते जन्म कहीयइ, ते कल्याणक कहीयइ, श्रासोजवदि १३ दिनइ श्रीमहावीर देवानंदानी कूखि थकी त्रिशलानी कूखि अाव्या, ते भणी ए तिथि कल्याणकनी थाइ, सहू गच्छनइ गीतार्थ पिण ६ कल्याणक श्रीमहावीरना मान्या छइ ते विचारि. नइजि मान्या छइ । अपरं जे आदीश्वरनइ अधिकारि श्रीजंबुदीवपन्नत्ती मांहि 'पंच उत्तरासाढे-अभीइ छटे x x x परिनिव्वुडे' एहवा पाठ छइ तिहां कल्याणकना अर्थ मिलइ नहीं, जे भणी कल्याणक आराधीयइ ते तिथइ थाइ परं नक्षत्रनउ आराधिवउ कल्याणक न होइ, इहां उत्तराषाढा नक्षत्र कह्यउ परं तिथिर्नु नाम न खार्यउ तउ स्यइ तिथि अाराधीयइ ? अभिषेक दिनइ अरिहंत भगवंतना आराध्य छइजि परं ते दिन न कह्या, श्रीआचारांग नियुक्तिमांहि दर्शन भावनानइ अधिकारि तीर्थंकरनी जन्माभिषेक भूमिका मान्य कही छइ, तिहां जे पहूंचइ ते सम्यक्त्व शुद्ध करइ, जइ जन्माभिषेक भूमिका आराध्य तउ राज्याभिषेक दिन किम आराध्य न थाइ ? पुणि ते दिन न जाणइ तउ स्युं आराधीयइ ? तथा 'पंच हत्युत्तरे होत्था' एहना अर्थ करतां पांच स्थानक ए पुणि थाइ, परं सगले गच्छे सगले गीतार्थे इहां पांच कल्याणकजि कही वखाण्या छइ, पछे लोकां चा हिवइ न मनाइ, ए अर्थ सगले गीतार्थे गच्छवासीए मान्या छइ, ए अर्थ इमजि धर्मार्थीए सदहिवा, श्रीजिनवल्लभाचार्यइ श्रीमहावीर(पर्यंत सगला तीर्थंकरो)ना १२० तथा १२१ सर्व कल्याणक कह्या, सगले गच्छे सगले गीतार्थे Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035209
Book TitlePrashnottar Chatvarinshat Shatak
Original Sutra AuthorN/A
AuthorBuddhisagar
PublisherPaydhuni Mahavir Jain Mandir Trust Fund
Publication Year1956
Total Pages464
LanguageSanskrit, Gujarati
ClassificationBook_Devnagari & Book_Gujarati
File Size24 MB
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