________________
११८
प्रश्नोत्तर चत्वारिंशत् शतक
तेहनइ द्रव्य विगइ तंबोलनी संख्या थाइ, वस्त्र नवा लेवानउ निषेध जयणा छइ, जे पोसह देसावगासिक व्रत करइ रहनइ दिसिन उ पुणि मान करिवउ घटई, जे भणी श्रीआवश्यकवृत्तिपंचाशकचूर्णि( पृ० १०३ )मांहि पोसह देनावगासिक साथि लेवा पुणि कह्या छइ, तद्यथा-" तं सत्तितो करेज्जा. तवो य जो वरिणओ समणधम्मे । देसावगासिएण य, जुत्तो सामाइएणं वा ॥१॥” इत्यावश्यकचूर्णी, जे पोसहमांहि जिमइ छइ तेहy द्रव्ये विगइ तंबोल असन साक प्रमुख द्रःयनी संख्या जोइयइजि. ते भणी पोसहमांहि १४ नियम यथायोगइ करिवाजि, पोसहमाहि जेई श्रावकनइ विगइ तंबोल पाणी आहारनी अविरति छइ, तेह श्रावकनइ काजि अन्न रंधाइ छइ पाणी फासू कराइ छइ, घरथी भातपाणी गृहस्थ छूटा उपासरइ आणइ छइ ते गृहस्थ यति सरीखर किम कहीई ? श्रावकनी ११ प्रतिमाअई यति समानवेषइ क्रियाई थाइ ते देसावगासिक म उचरिस्य उ पुणि पोसहता श्रावक देसागासिक व्रत पोसहमांहि ऊचरावइजि, एतलइ पोलह माहि १४ नियम सिद्धांतनइ न्यायइ उचरिवा, तथा तपागच्छनी सामाचारीनइ न्यायइ ऊचरिवा, तथा तपांना कीधा पडावश्यकना वालावबोधनाहि इन लिख्य उ छइ- 'जे सचित्तादि दिनाइयः नियम संक्षेपीयइ ते देशावकाशिक कहीय" ए पुणि पाठ विचारिवउ ।। ३२ ॥
मा-श्रावने बोसमा यो नियम सभावान (लेधये), કારણ? તેમાં કેટલાએક નિયમ નિષેધ રૂપ છે અને કેટલાએક Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com