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________________ जा सकता है क्या ? ऐसी प्रवास यात्रा विसी ने की है क्या ? ४-यदि पृथ्वी गोल हो, तो दि० ३०-८-१६०५ के दिन जो सर्यग्रहण हुआ था वह पश्चिम, उत्तरो अफ्रिका, प्राइसलेण्ड उतरी एशिया. साइबेरिया तथा ब्रिटिश अमेरिका के सम्पूर्ण भागों में दिखाई दिया था; तो अमेरिका और एशिया में एक साथ सूर्यग्रहण होना कसे सम्भव है ? क्योंकि दोनों देश वस्तुतः पृथ्वी के गोले की अपेक्षा से विरुद्ध दिशा में है । ५-यदि पृथ्वी गोल हो तो उत्तर ध्रव के समान दक्षिण ध्र व की ओर भी सनातन हिम श्रेणियों की ऊँचाई एक समान होनी चाहिए. किन्तु वस्तुत: वे समान हैं नहीं । क्योंकि दक्षिण अमेरिका में १६००० फुट ऊची हिम श्रेणियां हैं, जब कि उत्तर अमेरिका में हिम श्रेणियों की ऊंचाई घटते-घटते २००० फुट तथा प्रागे तो ४०० फुट ही ऊंची हिम-श्रेणियाँ मिलती हैं इसका क्या कारण है ? ६-यदि पृथ्वी गोल हो तो उत्तर ध्रव की ओर २०० मोल के घेराव में जैसी वनस्पति मिलती है वैसी ही दक्षिणी ध्रुव में क्यों नहीं मिलती ? Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035208
Book TitlePruthvi ke Akar evam Bhraman ke Vishay me Samikshtmak Prashnavali
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAbhaysagar
PublisherJambudwip Nirman Yojna
Publication Year1968
Total Pages26
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size5 MB
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