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________________ •प्रवन्धावली. संवत् नाम (२८) १७४६, वित्र सम्भूत चौपाई-जीव राज (९) १७४०. भचामर कथा-विनोदी लाल (३०) १७५१, अजित खेन फनकावती चौपाई-हर्ष सूरिस्त (३१) १७५२, ऋषि दत्ता चौपाई-प्रीति सागर (३२) , उत्तम कुमार चौपाई-विजय बन्द (३३) १७५४, पर प्रकारी पूजा-उदय रत (३४) १७५७, दशारण भद्र चौढालिया-जिनचन्द सूरि (३५) १५५८, जंवू स्वामी चौपाई-नय विमल (२३) , रसिंह कुमार चौपाई-मोहन विजय (३७) १७५६, श्रेणिक अभय कुमार चौपाई-कीर्ति सुन्दर (३८) १७६०, मानतुन मानववी चौपाई-मोहर विजय (३६ १७६६, सम्यक विचार गर्मित महावीर स्तवन-न्यायसागर १०) १९६६, मुवन मानु केक्ली रास-उदय रन (४१) , जिन रस खिझाय-घेणी राम (४२) १७७६, मानम सारोवार-देवचन्द्र (४३) , मोक्षमार्ग वनिका-" (४४) १०८३, सुमति पहेली चौपाई-पायवन्द (४५) १७८५, शांतिनाथ रास-राम विजय (४६) १७६८, माणिक देवी रास-निहाल चन्द (४६) १७६६, संयम श्रेणिक स्तुति-उत्तम विजय संवत् नंद निधि मुनि बंद, देव दया कर पायो। प्रथम जिनेश्वर पारण दिवसें,स्तवतां कलश बढ़ायो। नागरी प्रचारिणी पत्रिका (नवीन संस्करण सं० १६७४) मा०३ . २, १० १७१-१८८ । Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com
SR No.035203
Book TitlePrabandhavali - Collection of Articles of Late Puranchand Nahar
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPuranchand Nahar
PublisherVijaysinh Nahar
Publication Year1937
Total Pages212
LanguageHindi
ClassificationBook_Devnagari
File Size13 MB
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