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________________ [भाग-1] श्री आगमीय-सूक्तावलि-आदि आगमीय सूक्तावलि [बृहत्कल्पसूक्तानि] पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधित: मुनि दीपरत्नसागरेण पुन: संकलित: आगमीय-सूक्तावलि-आदि (आगम-संबंधी-साहित्य) श्री बृहत्कल्पस्य सूक्तानि आगमीय सूक्तावली ॥४शा M ALA ७९ साहणं पसहीए रति महिला न कप्पए पंती। (१६७-२-१) सुद्धपरिणामजुत्तो तस्स उ अणहकमो पाली । (२०६-२-५) ८० जागरह नरा णिच्चं जागरमाणस्स पहुए बुद्धी । जो |८४ तेलोकदेवमहिया तिस्थयरा नीरया गया सिद्धिथेरावि सुपति न सो धण्णो जो जग्गति सोसया धष्णो (१६७-२-४) गया केई चरणगुणपभाषया धीरा ॥ बंभी य सुंदरी या सीयंति सुवंताणं अत्था पुरिसाण लोगसारत्था । | अनाविय जाउ लोगजिट्ठाओ । ताओ चिय कालगया तम्हा जागरमाणा विधुणध पोराणयं कम्मं ॥ सुवति किं पुण सेसाउ अजाओ ॥ नहु होइ सोइयब्यो जो सुवंतस्स सुत्तं संकितखलियं भवे पमत्तस्स । जागर- कालगतो दढो चरित्तंमि । सो होइ सोइयव्यो जो संजममाणस्म सुत्तं चिरपरिचितमप्पमत्तस्स ॥ जागरिया दुबलो विहरे । लण माणुसत्तं संजमसारं च दुल. धम्मीणं, अहम्मीणं च सुत्तया सेया। (१६७-२)/ भं जीवा । आणाइ पमाएर्ण दोग्गहभयवहणा होति । सुबह य अयगरभूओ सुयं च से नासई अमयभूयं । (२१०-१-२) होहिर गोण भूभो नटुंमि सुग अमयभूए ॥ (१६८-१-३)/८५ संतविभवा जद तय करेंति अबउज्झिऊण हीमोसीयंत८१ ज देउलादी उ निवेसणस्सा, मझमि गुत्तं सुपुरोहर्ड च।। थिरीकरणं तित्वविवड्डी य वणो य। (२१२-२-११) अदुद्दगम्म णय दुट्ठमझे, अदूरगेहं तहियं बसंति ॥ |८६ सोऊण ऊ गिलाणि पंथे गामे य भिक्खदेखाए । जुधाणगा जे सविगारगा य, पुत्तादओ तुज्झ रहं वसंति। । जा तुरियं नागच्छा लग्गा गुरुए चउम्मासे ॥ (२१४-१-२) मा तेऽवि अम्हं रह संवयंतु, इच्छंति सत्ते य वसंति तत्थ ॥ ८७ गयो निम्मद्दयता निरवेक्खो निहयो निरंतरया। (१८१-२-८) भूताणं तुबधाओ कसिणे चम्ममि छद्दोसा ॥ (२२३-२-२)|८ ८२ अभंतरं य बझं हरति रयं तेण होइ रयहरणं । (२०३-१-३)/ ८८ बिरतो पुण जो जाणं कुणति गीयत्थो व अध्यनयो वा। ८३ संजममहातडागरस जाणवेरगसुपडिपुषणस्स। | तत्थवि अज्झत्यसमा संजापति णिज्जरामचओ (२३३-१-५)14 BRRRRRAI ॥४१॥ "आगम-संबंधी-साहित्य" श्रेणी [भाग-1] ~53.
SR No.035071
Book TitleAagam Sambandhi Saahitya 01 Aagamiy Sooktaavalyaadi
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages96
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_related_other_literature
File Size20 MB
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