SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 196
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ आगम (४०) [भाग-5] "आवश्यक - मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+वृत्ति:) ३ अध्ययनं [-], नियुक्ति: [७६३-७६४], वि०भा०गाथा -1, भाष्यं [१३७...], मूलं -/गाथा-] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं मलयगिरिसूरिरचिता वृत्ति: प्रत सूत्रांक सुटुयर अद्धिई जाया, ताहे सामी गोयम भणइ-किं देवाणं वयणं गेझं उयाहु जिणवराणं, गोयमो भणइ-जिणव-1- राणं, कीस अद्धिई करेसि!, ताहे सामी चत्तारि कडे पन्नवेइ, तंजहा-सुंबकडे विदलकडे चम्मकडे कंवलकडे, एवं सीसावि सुंबकडसमाणा जाव कंबळकडसमाणा, तुमं च मम गोयमा केबलकडसमाणो, किंच-चिरसंसिट्ठो सि मे कागोयमा !, पण्णत्तीआलावगा भाणियबा, जाव अविसेसामणाणत्ता भविस्सामो, ताहे गोयमनिस्साए दुमपत्तं णाम अज्झट्रायणं पन्नवेइ । देवोऽवि वेसमणो ततो चइता अवन्तिजणवए तुंबवणसन्निवेसे धणगिरी नाम इन्भपुत्तो, सो य सद्धो पब इउकामो, तस्स मायापियरो वारंति, पच्छा सो जत्थ जत्थ वरिजइ तत्थ तत्थ ताणि विप्परिणामेइ जहाऽहं पचाउ-18 कामो, इओ य धणवालस्स इन्भस्स दुहिया सुनंदा नाम, सा भणइ-मम देह, सा तस्स दिन्ना, तीसे य भाया अजसदूमिओ पुर्व पबइओ सीहगिरिसगासे, तीसे य सुनंदाए कुच्छिसि सो देवो उबवन्नो, ताहे भणइ धगिरी-एस ते गम्भो | विइजओ होहिइत्ति सीहगिरिसगासे पपइओ, इमोऽवि नवण्हं मासाणं दारगो जातो, तत्थ महिलाहिं आगयाहिं भण्णइ जह से पिया न पपइतो होतो ता लढें होतं, सो सन्ची जाणइ-जहा मम पिया पबइतो, तस्सेवं अणुचिंतेमाणस्स जाइ-12 दूसरणं समुप्पण्णं, ताहे रत्तिं दिवा य रोवइ, जेण सा निधिज्जइ, ततो सुहं पबइस्संति, एवं छम्मासा वञ्चति । अण्पदया आयरिया समोसढा, वाहे अजसमिओ धणगिरी य आयरियमापुच्छति, जहा सन्नायगाणि पेच्छामोत्ति संदिसावेंति, सउणेण य वाहिये, आयरिएहि भणिय-महंतो लाभो, जं अज सचित्तं वा अचित्तं वा लभह तं सर्व लएह, ते गया, उपसग्गिउमारद्धा, अण्णाहिं महिलाहिं भण्णह-एयं से दारगं णीणेहि, तो कहिं नेहिम्ति , पच्छा ताए भणियं-मए एव दीप अनुक्रम ~196~
SR No.035065
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 05 Aavashyak Niryukti evam Vrutti Aagam 40 Part 3
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages327
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
JainGPT.orgInstagram
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy