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________________ पृष्ठांक २२३ ३०७ ३०७ मूलाका: ८६८ + ११४ मूलांक:: विषय: शतक - २४ ८३५ | उद्देशक: ०१ नैरयिक ८४३ उद्देशक: ०२ परिमाण ८४४ | उद्देशक: ०३-११नागादिकुमारा ८४६ उद्देशक: १२-१६ पृथ्व्यादि ८५३ उद्देशक: १७-२० बेईन्द्रियादि ८५७ उद्देशक: २१-२४ मनुष्यादि शतक - २५ उद्देशका: १-१२ लेश्या, द्रव्य, संस्थान, युग्म,पर्यव, निर्गन्थ संयत, ओघ, भव्य, अभव्य, सम्यग्दृष्टि, मिथ्यादृष्टि शतक - २६ उद्देशका: १-११ जीव, लेश्या, पखिय, दृष्टि, अज्ञान, ज्ञान, संज्ञा,वेद,कषाय,उपयोग,योग शतक-२७ | उद्देशका: १-११ जीव आदि-- जाव २६ शतक भगवती (अङ्ग)सूत्रस्य विषयानुक्रम दीप-अनुक्रमा: १०८७ मूलांक: विषय: पृष्ठांक: मलाक: विषय: पृष्ठांक: शतक - २८ २९२ ___शतकं - ३५ ९९२ | उद्देशका: १-११ जीव आदि-- १०४४ | एकेन्द्रिय शतकानि-१२ जाव २६ शतक शतकं - ३६ शतक - २९ | बेन्द्रिय शतकानि-१२ | उद्देशका: १-११ जीव आदि-- शतकं - ३७ ३०८ जाव २६ शतक १०६१ | त्रिन्द्रिय शतक शतकं -३० शतकं - ३८ ३०८ ९९८ | उद्देशका: १-११ समवसरण, १०६२ चतुरिन्द्रिय शतक लेश्या आदि शतकं - ३९ ३०८ शतकं -३१ २९८ १०६३ | असंज्ञीपंचेन्द्रिय शतकानि १००३ | उद्देशका: १-२८ युग्म, नरक, शतकं -४० उपपात आदि विषयका: १०६४ संज्ञीपंचेन्द्रिय शतकानि शतकं - ३२ . | शतकं-४१ उद्देशका: १-२८ नारक्स्य --- १०६८ से | उद्देशका: १-१९६ राशियुग्म, उद्वर्तन, उपपात, लेश्यादि --१०७९ | व्योजराशि, द्वापरयुग्मराशि शतकं - ३३ कल्योजराशि इत्यादि १०१८ | एकेन्द्रिय शतकानि-१२ शतकं - ३४ ३०० । । १०८० से | उपसंहार गाथा १०३३ | एकेन्द्रिय शतकानि-१२ ---१०८६ | | परिसमाप्त: २९९ ९७५ १०१६ पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्रा०५] अंगसूत्रा०५] भगवती मूलं एवं दानशेखरसूरिरचिता वृत्ति: ~14~
SR No.035062
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 02 Bhagavati Mool evam Vrutti Aagam 5 Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages318
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size87 MB
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