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________________ ७८९ मलाइका: ८६८ + ११४ भगवती (अङ्ग)सुत्रस्य विषयानुक्रम दीप-अनुक्रमा: १०८७ | मुलांक: विषय: पृष्ठांक: | मूलांक: विषय: पृष्ठांक | मूलांक: विषय: पृष्ठांक: __.....शतक-१४ .....शतक - १७ .....शतकं - १९ ६१५ | उद्देशक: ०६ आहार ७०६ | उद्देशक: ०४ क्रिया ७७० | उद्देशक: ०८ निर्वृत्ति ६१८ | उद्देशक: ०७ संश्लिष्ट ७०८ | उद्देशका: ६-११ 668 | उद्देशक: ०९ करण ६२४ | उद्देशक: ०८ अंतर ७१५ | उद्देशक: १२ एकेन्द्रिय ७७५ | उद्देशक: १० व्यंतर ६३१ | उद्देशक: ०९ अनगार ७१६ | उद्देशका:१३-१७ शतकं.२० ६३६ | उद्देशक: १० केवली शतकं- १८ ७७९ | उद्देशक: ०१ बेईन्द्रिय । शतकं- १५ १४७ ७२१ | उद्देशक: ०१ प्रथम | उद्देशक: ०२ आकाश ६३७ --गोशालक १४७ ७२७ । उद्देशक: ०२ विशाखा | उद्देशक: ०३ प्राणवध . शतकं - १६ १६३ ७२८ | उद्देशक: ०३ माकंदीपुत्र ७८५ | उद्देशक: ०४ उपचय ६६० | उद्देशक: ०१ अधिकरण ७३३ | उद्देशक: ०४ प्राणातिपात ७८६ | उद्देशक: ०५ परमाण ६६६ | उद्देशक: ०२ जरा ७३६ | उद्देशक: ०५ असुरकुमार ७८९ | उद्देशक: ०६ अंतर ६७० | उद्देशक: ०३ कर्म ७४० | उद्देशक: ०६ गुडवर्णादि ७९२ | उद्देशक: ०७ बन्ध ६७२ | उद्देशक: ०४ जावंतिय ७४२ | उद्देशक: ०७ केवली ७९३ | उद्देशक: ०८ भूमि ६७३ | उद्देशक: ०५ गंगदत्त ७४९ | उद्देशक: ०८ अनगारक्रिया ८०१ | उद्देशक: ०९ चारण ६७७ | उद्देशक: ०६ स्वप्न ७५० | उद्देशक: ०९ भव्यद्रव्य | उद्देशक: १० आय ६८२ | उद्देशक: ०७ उपयोग ७५३ | उद्देशक: १० सोमिल । शतकं -२१ ६८३ | उद्देशक: ०८ लोक शतक - १९..... वर्ग: १ शाली-आदि ६८७ | उद्देशक: ०९ बलिन्द्र ७५८ | उद्देशक: ०१ लेश्या | वर्गा:२-८ मूलअलसी, वंश, ६८८ | उद्देशक: १० अवधि ७६० | उद्देशक: ०२ गर्भ | इक्षु,सेडिय, अमरुह, तुलसी ६८९ | उद्देशक: ११-१४ दविपादि० ७६१ उद्देशक: ०३ पृथ्वी शतक - २२ ... | शतक - १७..... ७६५ | उद्देशक: ०४ महाश्रव वर्गा:१-६ताड़,निम्ब,अगस्ति ६९३ | उद्देशक: ०१ कंजर ७६६ उद्देशक: ०५ चरम | वेंगन, सिरियक,पुष्पकलिका ६९९ | उद्देशक: ०२ संयत ७६८ | उद्देशक: ०६ द्वीप | शतक - २३ ७०३ | उद्देशक: ०३ शैलेशी ७६९ | उद्देशक: ०७ भवन ८२९ । वर्गा:१-४आलू,लोही,आय,पाठा पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र[०५] अंगसूत्रा०५] भगवती मूलं एवं दानशेखरसूरिरचिता वृत्ति: २२३ ~13.
SR No.035062
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 2 02 Bhagavati Mool evam Vrutti Aagam 5 Part 2
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages318
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_bhagwati
File Size87 MB
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