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________________ आगम (४०) भाग-5 "आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 3 अध्ययनं [४], मूलं [सूत्र /११-३६] / [गाथा-१,२], नियुक्ति : [१२४३-१४१५/१२३१-१४१८], भाष्यं [२०५-२२७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 निन्दायां प्रत सूत्रांक दारिका A6 + गाथा: ||१२|| प्रतिक्रमणा तरितव्या प पतिण्णया मरितव्वं वा समरे समथएण। असरिसवयणुप्फेसया नहु सहितव्वा कुले पसूप- ध्ययन एणं ॥ १२५५ ।। गीतीए भावस्थो, जथा के लबूजसा सामिसंमाणिया मुभता रणे पहारितुवरता भज्जमाणा एगेण समक्ख.. जसावलंबिणा अफालिता- नो सोभिस्सह पढिप्पहरा गच्छमाणत्ति, तं सोतुं पडिनियत्ता, ते य ठिता, पडिता पराणीए, मग्गं च | तेहिं पराणीय,समाणिया य पभुणा,पच्छा सुभडवाद सोभति वहमाणा,एत गीतत्थं सोतुं तस्स चिंता जाता-एमेव संगामत्थाणीका पवज्जा, जदि ततो पराभज्जामि तो असरिसजणेण हीलिज्जामि,एस समणपच्चोगलितोत्ति पडिनियत्तो,आलोइयपडिक्कतेण | ताआयरियाण इच्छा पडिपूरिता, एवं भावे पडिचोयणत्ति ॥ निंदावि छविधा तहेव, तत्थ उदाहरणं दोण्हं कण्णगाणं वितिया कण्णगा चित्तकरदारिया,जथा-एगो राया दुर्य पुच्छति४ किं मम नत्थि जे अण्णरातीण अत्यि, चित्तसभा नस्थित्ति, आणत्ता णिम्माणिया, चित्तकारकसेणीए विरिक्का, एगस्स चित्त कारगस्स धीता पितुं भचं गहाय गच्छति, राया मग्गेण आसेण वेगविप्पमुक्केण एति, सा पलायंती किहवि फिडिता गता, पिता सेतं ठवितूण सरीरचिताए गतो, तीए वण्णेहिं तत्थ कोट्टिमे मोरपिच्छं लिहित, रायावि तत्थ चक्कमणयं करति, सावि अणचित्रेणं * अच्छति, रायाए पिच्छे दिट्ठी गता, गेहामित्ति हत्थो पसारितो, नहाणि दुक्खाविताणि, ताए हसित, भणति य-तिहिं पादेहिं । मम मुक्खासण न ठाति जाव चउत्थं मग्गामि, नवरं तुगं चउत्थो, राया पुच्छति- किहत्ति, सा भणति- अहं च पिताए कूरं आणामि जाव एगो पुरिसो नगरमज्झे आस वाहेति, नस्थि से घिणा मा किहवि किंचि मारिज्जामिति, तत्थ अहं सएदि पुण्णेहि | जीविता, वितिया राया, तेण चित्तकराणं विरिक्का सहा, तत्थ एक्कक्के कुटुंबे बहुगा मणूसा चित्तकरा, मम पिता एककल्लओ - दीप अनुक्रम [११-३६] ॥७॥ - (70)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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