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________________ आगम (४०) | भाग-5 “आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 3 अध्ययनं [६], मूलं [सूत्र /६३-९२] / [गाथा-], नियुक्ति : [१६५२-१७१९/१५५५-१६२३], भाष्यं (२३८-२५३] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रत सूत्रांक [सू.] प्रत्याख्यानचूर्णिः ॥३१९॥ दीप अनुक्रम [६३-९२] | बिलअप्पाउगं जदि उद्धरित तीरति, उद्धरिएणं न हम्मति । गिहस्थसंसहे णाम जदि गिहत्थडोयलियभायण या लेखाचा आकार कूसणादीहिं तेण जदि इसित्ति लेवादीहिं देति ा भजति, जदि बहुरसो आलिीखज्जति बहुतो ताहे ण कप्पति, परिवाचणिय- बापाला महत्तरगसमाहीतो तहेच ६ ॥ इयाणि अभचट्ठो। तस्स पंच आगारा- अणाभाग सहसक्कारा पारिहावाणिया महयरा समाहिति जति तिविहस्स पचयखाति विगिचणिय कप्पति,जदि चउब्धिहस्स पाणगं च नास्थि न पद्दति,जदि पण पाणगंपि उडरिय ताहे से कप्पति ।। जदि तिविहस्स पश्चक्वाति ताहे से पाणगस्स छ आगारा-लेबाहेण या अलेवाडेन वा अोणIDI वा पहलेण वा ससित्धेण वा असिस्थण वा बासिरति । वुत्तस्था एते पदा छप्पिाचरिमं दुविहं-भवचरिम दिवसचरिमाला च, तत्थ भवचरिमं णाम जावीचं गतं,तस्स चत्वारि आगारा,दिवसचरिमस्स अणाभोगो सहस्सकारो महत्तरागारो सबसमाहीती, II जावजीवकस्सपि एमेव चत्वारि ८। अभिग्गहे अवाउडियस्स पच्चक्खाति, अणाभोगे सहसक्कारो चोलपट्टएणं महरिंग सामधित्ति एते पंच, सेसाणं अभिग्गहाणं एते चेव चोलपट्टयजं चत्तारि आगारा ९। निश्चितीए णव आगारा, अहवा तत्थ चिगतिला सचिव न जाणामो,का य विगतित्ति,तस्थ नव विगतीतो खीरं दधि नवनीतं सपि तेलु महुँ मजं गुलो पुग्गलत्ति, तत्थ पंच खीरा४णि-गावणिं महिसीण उट्टीणं अजाणं एलियाणं,उट्ठीणं दधि नत्थि नपनीतं धर्य च, णवणीतघयवजा, चत्तारि खीरा, असलिहसुनसे सरिसवतेल्याणि, एयातो विगतीतो लेबाडातिं पुण होंति । दो बिगहा कट्टनिष्पणं उच्छुमादि पिट्ठनिष्फण्णं,फाणिया दोभि-दयगुडी या ॥३१९।। कापिंडगुडो य, मधूणि तिष्णि-मच्छियं कुत्तियं भामरं,पोग्गलाण जलचरं थलचरं खहचरं अहवा चम्म मैसं सोणितं । एयातो नव विगतीती, द्र ओगादिमं च दसमं तं जाहे कबल्ली अद्दहिया ताहे एग ओगाहिमगं चलंतं पञ्चति,सफ्फेणं तेणेव धारणं चितियं ततियंति,सेसाणि अजोग -ECRE (332)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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