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________________ आगम (४०) भाग-5 "आवश्यक- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 3 अध्ययनं [४], मूलं [सूत्र /११-३६] / [गाथा-१,२], नियुक्ति : [१२४३-१४१५/१२३१-१४१८], भाष्यं [२०५-२२७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता: आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रत सुत्रांक + गाथा: ||१२|| प्रतिक्रमणाला सेण चेडमस्स दूत पेसेति-जदि गता कुमारा गता, मम हत्थी पेसह, डओ भणति-जहा तुम दोहितो तथा एतेऽवि, किहालचटकेनसह ध्ययने एताणं हरामि', न देमिति, दतो अतिगतो कहितं च, पुणोऽवि दुतो पढवितो-देह न देति, ताहे भणति-जुद्धसज्जा | होह एमिति, भण्णति-जथा सच्चति, ताहे कूणिएण कालादिया दस कुमारा आवाहिता, तत्थ एक्केक्कस्स तिण्णि तिष्णि II ॥१७॥ हस्थीसहस्साणि तिष्णि तिण्णि रहसहस्साणि तिण्णि तिणि अस्ससतसहस्साणि तिण्णि तिणि मणूस्सा कोडिओ, कृणिकस्सवि एत्तिक, कसबसंक्खेबो-तेत्तीस सहस्सा हत्थीणं रहाणं च हयाणं च सतसहस्सा,कोडीओ मणूसाणं,तं सोतूण चेडएणवि गणरायाणो मोलता देसपते ठिता,तेसिपि अट्ठारसण्हं रायीणं समं चेडएणं तओ हस्थिसहस्सा रहसहस्सा मणुस्स कोडीओ तहा चेव, नवरि संखेवो-सत्तावण्णा सत्तावण्णो । ताहे जुद्धं संपलग्गं, कूणिकस्स कालो डंडणादओ, दो चूहा कता कोणिकस्स गरुलबृहो चेडगस्स सागरचूहो, कालो जुझंतो ताच गतो जाव चेडओ, चेडएण एकस्स सरस्स आगारो कतो, सो य अमाहो, तेण सो कालो मारितो, भग्गं कूणिकस्सा दबक, पडिनियत्ता सए आवासे, एवं दसहि दिवसेहिं दसवि जणा हता चेडएण कालादीया,एक्कारसमे दिवसे कोणिओ अट्ठमभत्ता गेण्हति, सक्कचमरा आगता, सक्को भणति- चेडओ सावओ अहं न पहरामि, नवरं तुम सारक्खामि, एत्थ महासिलाकंटको । स्थमुसले य वण्णेतध्वा जथा पण्णत्तीए, ते किर चमरेण विकुब्बिता, ताहे चेडगसरो किर बइरपडिरूवगे अप्फिडति, गणता&ायाणो णट्ठा सनगरे गता. चेडओ विसालि गतो, रोधकसज्जो ठितो । एवं वारस वासा जाता रोहिज्जंतस्स, तत्थ य रोधए बा ॥१७॥ विहल्ला सेयणएण निम्गता पलं मारेति दिणे दिणे, कुणिओधि परिक्खिहिअति हत्थिणा, अण्णदा चिंतेति-को उवाओ जेण मारेइज्जेज्जा, कमारामच्या भणति-जदि नपरि हत्थी मारिज्जति, अमरिसिओ भणति-मारेज्जउ, ताहे इंगालखड्डा कता, तारे सेयणओगी EASEARSEARCH दीप अनुक्रम [११-३६] (186)
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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