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________________ आगम (४०) प्रत सूत्रांक [सू.] + गाथा: ॥१२॥ टीप अनुक्रम [११-३६] भाग-5 "आवश्यक" मूलसूत्र-१ (निर्युक्तिः+चूर्णि:) 3 आयं [२०१-२२७] अध्ययनं [४], मूलं [सूत्र / ११-३६ ] / [गाथा-१,२] निर्मुक्तिः [१२४३-१४१५/१२३१-१४१८ पूज्य आगमोद्धारकश्री संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिताः आगमसूत्र [४०] मूलसूत्र [०१] आवश्यकनिर्युक्तिः एवं जिनभद्रगणिरचिताचूर्णि: 3 प्रतिक्रमणा ध्ययने ॥ १४७॥ मणोषयी ॥ १६ ॥ ५१॥ अहस्ससच्चं अणुवीयभासर, जे कोहली भभयमोहवज्जए । से बीहरायं समुप्पेहि पासिया, मुणी हि मोसं परिवज्जए सया ।। १६ । ५२ ॥ सयमेव उपग्गजायणे घडे, मतिमं अणिसं असति भिक्खु ओग्गहं । अणुष्णविय भुंजिय पाणभोयणं, जाइत्ता साहम्मियाण उग्गहं ॥ १६ ॥ ५३ ॥ आहारगुप्ते अविभूसि तप्पा, इथि न णिज्झाए ण संघवेज्जा । बुद्धे मुणी खुद्दकडं न कुज्जा, धम्माणुपेही संघ भरं ॥ १६ ॥ ५४|| जे सहरूवरसगंधमागते, फासे य पप्य मणुण्णपावर । गेधिं पदोर्स न करेंति पंडिते, से होति दन्ते विरते अकिंचणे ।। १६ ।। ५५ ।। अण्णे पुण एताहिं गाथाहिं पणुवीसं भावणा अणुभासन्ति, तंजधा पणुवीसभाषणाओ पंचन्ह मह्यताणमेताओ। भणिपाओ जिणगणहरपुज्जेहिं णवर सुत्तंमि ॥ १ ॥ इरियासमिती पदमं आलोइयअण्णपाणभोई या । आदाण मंडनिक्वणाय समिती भवे ततिया ॥ २ ॥ मणसमिती वयसमिती पाणनिवार्यमि होति पंचेया । हास परिहार अणुवीतिभासणा कोधलोभपरिण्णा ॥ ३ ॥ एस मुसावायस्सा अदिष्णदाणस्स होंतिमा पंच पहुसंदिट्ट पहुं वा पढमोग्गहजाए अणुवीई ॥४ ॥ ओग्गहणसील बितिया तत्तो गेव्हेज्ज उग्गहं जहियं । तणडगलमल्लगादी अणुण्णवेज्जा तर्हि तहियं ॥ ५ ॥ तच्चमि उग्गहंन् अणुण्णवे सारिउग्गहे जाव । तावलिए मेर कानुं न कप्पती चाहिए तस्स || ६ || भावण पउत्थ साहम्मियाण सामण्णमंणपाणं | संघाडगमादणि भुजेज्ज अणुण्णविय ते उ ॥ ७ ॥ पंचामेयं गंतॄण सामिय उग्गहे अणुण्णविय । ठाणादी चेतेज्जा पंचताऽदिष्णदाणस्स || ८ || नवय भावणाओ णो अनिमातापणीतमाहारो । दोच्च अविभूसणा उ विभूमती ण तु हवेज्जा (160) महाव्रतभावनाः ॥ १४७॥
SR No.035055
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 06 Aavashyak 3 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages343
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size27 MB
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