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________________ आगम (४०) भाग-3 “आवश्यक"- मूलसूत्र-१ (नियुक्ति:+चूर्णि:) 1 अध्ययनं मूलं - /गाथा-], नियुक्ति: [१२६/३४६-३४९], भाष्यं [३२-३७] पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[०१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 श्री प्रत भरतस्यदिग्विजयः GEI95 भरहेपि यणं हाते जाव गयवर्ति गरवती दुरुढे, तए ण से भरहे मणिरयण परामुसइ, तो तं चउरंगुलप्पमाणमेस च अणग्य 1 आवश्यक तंस छलस अणोवमजुति दिवं मणि रयणपतिसमं बेरुलिय सम्बभूतकंत जेण य मुद्धागतेणं दुक्खं न किंचि जाव हवति, अरोगे चूर्णी य सब्वकालं, तेरिच्छियदिव्वमाणुसकता य उबसग्गा सब्बे ण कति तस्स दुक्ख, संगामेऽविय असत्थवज्झो होहिति णरो, उपोद्घातामणिवरं धरतो ठितजोवणकेसअवट्टितणहो, हवति य सब्बमयविप्पमुक्का, तं मणिरयण गहाय से परवई हत्थिरयणस्स दाहिणिनियुक्ताल्लाए कुंभीए निक्खिवेद । तए णं से भरहााहवे नरिंदे हारोत्थयसुकयरइयवच्छेजाव अमरवतीसंनिभाइड्डीए पहियकित्ती मणि निरयणकउज्जोवे चक्करयणदेसियमग्गे अणेगरायवरसहस्साणुजातमम्ग महता उफिट्ठिसिंहनादबोलकलकलरवेण पक्खुभियसमुदरवभूयIPI पिव करेमाणे करेमाणे तिमिसिगुहे दाहिणिल्लेणं द्वारेण अतोति ससिध मेहंधकारणिवहं । | तए ण से भरहे छत्तलं दुवालसंसिय अट्ठकण्णिाकं अहिकरणसठित अवसोवनि कागणिरयणं परामुसति, तए ण तं चउर& गुलप्पमाणमेत्तं अट्ठसुवनं च विसहरणं अतुलं चउरंससंठाणसंठियं समतलं माणुम्माणपमाणजोगजुत्तोलोगे चरति सव्वजणपन्न वणका णवि चंदे ण किर तत्थ सूरे णवि अग्गी ण इव तत्थ मणिं णो तिमिरं नासेति अंधकारे जत्थ तेहिं तकं दिल्बप्पभावजुत्तं, | दुवालसजोयणाणि तस्स लेसाउ विव९ति तिमिरणिगरपडिसिहिकाओ, रतिं च सयकाल खंधाबारे करति आलोक दिवसभूत, जस्स & पहावेण चकवट्टी तिमिसगुहमतीति सेनसहिते अभिजेतुं वितियमड्डमरहं, रायपवरे कागिणिं गहाय तिमिसगुहापुरथिमपञ्चस्थि मिल्लसु कडएसु जोयणंतरियाई पंचधणुसयायामविक्खंभाई जोयणुज्जोयकराई चकनेमिसंठियाई चंदमंडलपडिणिकासाई एगणपन्नट्रमंडलाई आलिहमाणे २ अणुपविसइ, जाव धरति चकबट्टी ताव किर गाणि मंडलाणि धरंति, गुहा य किर तहा उग्घाडिया चेव ।। दीप अनुक्रम ॥१९॥ [205]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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