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________________ मूलाङ्का : ५०+२१ .. आवश्यक मूल-सूत्रस्य विषयानुक्रम (भाग-१ से ३) दीप-अनुक्रमा: ९२ मुलाक: अध्ययनं पृष्ठांक पृष्ठांक: अध्ययनं ३-वंदनकं ६-प्रत्याख्यानं 3/ ११-३६ ४-प्रतिक्रमणं मलाक: अध्ययनं | पृष्ठांक । मलांक: ०३-०९ २-चतुर्विंशतिस्तव: 3/ ३७-६२ ५-कायोत्सर्ग ६३-९२ आवश्यक सटीक (संक्षिप्त) विषयानक्रम: नि./भा. अध्ययनं पृष्ठांक: नि./भा. 3/ अध्ययन नियुक्ति | भाष्य पृष्ठांक: अध्ययनं | पृष्ठांक: भाग-3 अध्ययनं-२सूत्रपाठः, कीर्तन, प्रतिज्ञा, --अर्हत: विशेषणं, --ऋषभादि नामानि, अध्ययन-५- कायोत्सर्ग: | सूत्रपाठः, कायोत्सर्गस्थापना श्रुतस्तव, सिद्धस्तवादि अध्ययनं-४- प्रतिक्रमणं नमस्कार व सामायिक-सूत्रं | चत्वार: लोकोतम-मङ्गल एवं -----------शरणभूत | संक्षिप्त व ईर्यापथ | शयन संबंधी प्रतिक्रमणं | भिक्षाचर्याया: प्रतिक्रमणं स्वाध्याय, असंयम आदि ३३सत्रोच्चारणे मिथ्यादष्कृतम् प्रवचनस्तृति, वंदना, अध्ययन-३- वन्दनं --गुरुवन्दन सूत्रपाठ: -मितावग्रह प्रवेशयाचना --क्षमापना, प्रतिक्रमण अध्ययन-६- प्रत्याख्यानं सम्यक्त्व एवं श्रावकव्रतप्रतिज्ञा विविध प्रत्याख्यानादिः ... आवश्यक-चूर्णि के विषयानुक्रममें हमने भाग का क्रमांक एवं पृष्ठांक दोनो लिख दिये है ... ल्याला दाल मारल्या पूज्य आगमोद्धारकरी संशोधिता मुनि दीपरत्नसागरेण संकलिता आगमसूत्र-[४०] मूलसूत्र-[१] आवश्यकनियुक्ति: एवं जिनभद्रगणिरचिता चूर्णि:-1 [11]
SR No.035053
Book TitleSachoornik Aagam Suttaani 04 Aavashyak 1 Niryukti Evam Churni Aagam 40
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherParam Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
Publication Year2017
Total Pages320
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_aavashyak
File Size25 MB
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