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[३०-वृ] श्री गच्छाचार ( प्रकीर्णक) सूत्रम्
नमो नमो निम्मलदंसणस्स पूज्य श्रीआनंद-क्षमा-ललित-सुशील-सुधर्मसागर गुरुभ्यो नमः
“गच्छाचार" मूलं एवं वृत्ति:
[मूलं एवं वानर्षिगणि विवृत्ता वृत्तिः]
[आद्य संपादकश्री]
पूज्य आगमोद्धारक आचार्यदेव श्री आनंदसागर सूरीश्वरजी म. सा.
(किञ्चित् वैशिष्ठ्यं समर्पितेन सह )
पुनः संकलनकर्ता मुनि दीपरत्नसागर (M.Com., M.Ed., Ph.D., श्रुतमहर्षि)
'सवृत्तिक-आगम-सुत्ताणि श्रेणि भाग-40
28/07/2017 शुक्रवार, २०७३ श्रावण शुक्ल ५
श्री आगमोद्धारक-वाचना- शताब्दी वर्ष - निमित्त 'आगम-वृत्ति - मुद्रण- प्रोजेक्ट'
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