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________________ आगम (२८-७) “तन्दुलवैचारिकं” - प्रकीर्णकसूत्र-५ (मूलं+अवचूर्णि:) ---------------- मूलं [१९]/गाथा ||१२१...||---------- मुनि दीपरत्नसागरेण संकलित.....आगमसूत्र-२८-व], प्रकीर्णकसूत्र-[१] "तंदुलवैचारिकं” मूलं एवं विजयविमल गणि कृता अवचूर्णि: प्रत सूत्रांक [१९] ||१२१.|| 555555555575453 किंपागफलमिव मुहमहराओ ५३ रित्तमुट्ठीविव बाललोभणिज्जाओ ५४ मंसपेसीगहणमिव सोववाओ ५५ जलियचुडिलीविव अमुच्चमाणदहणसीलाओ ५६ अरिहमिव दुल्लंघणिजाओ५७ कूडकरिसावणो विव कालविजासंवायणसीलाओ ५८चंडसीलोविव दुक्खरक्खियाओ ५९ अइविसाओ ६० दुगुंछियाओ ६१ दुरुवचा-18|| राओ ६२ अगंभीराओ ६३ अविस्ससणिज्जाओ ६४ अणवत्थियाओ ६५ दुक्खरक्खियाओ ६६ दुक्खपालियाओ ६७ अरइकराओ ६८ कक्कसाओ ६९ दढवेराओ ७० रूवसोहग्गमओमत्ताओ ७१ भुयगगइकुडि| लहिययाओ ७२ कतारगइट्ठाणभूयाओ ७३ कुलसयणमित्तभेयणकारिकाओ ७४ परदोसपरगा सियाओ ७५ | कयग्घाओ ७६ बलसोहियाओ ७७ एगतहरणकोलाओ ७९ चंचलाओ ७९ जोइभंडोवरागो विव मुहरागविरागाओ ८० अवियाइं ताओ अंतरंगभंगसय ८१ अरज्जुओ पासो ८२ अदारुया अडवी ८३ अणलस्स निलओ ८४ अइक्खा वेयरणी ८५ अणामिया वाही ८६ अविओगो विप्पलाओ ८७ अरु उबसगो ८८४ रइवंतो चित्तविन्भमो ८९ सवंगओ दाहो ९० अणग्भया वजासणी ९१ असलिलप्पवाहो ९२ समुहरओ ९३ | __ 'जाओ चिय इमाओं' इत आरभ्य 'असिव छिज्जिर जे इति पर्यन्तं गद्यं, या एव इमाः-वक्ष्यमाणाः खियः | अनेकैः कविवरसहस्रः विविधपाशप्रतिबद्धैः कामरागमोहैः-मन्मथरागमूढः 'वन्नियाउ'त्ति वर्णिताः शृङ्गारादिवर्णनप्र-2 कारणेति 'ताओवित्ति ता अपि ईदृश्यः-वक्ष्यमाणस्वरूपा ज्ञातव्याः, तद्यथा-'पगइविसमाओ'त्ति प्रकृत्या-खभा४ वेन विषमा-वक्रभावयुक्ताः, आवश्यकोतपतिमारिकादिवत् १ 'पिय०' प्रियवचनवलयः-मिष्टवाणीमञ्जयः ज्ञातो दीप अनुक्रम [१४३] ~280
SR No.035040
Book TitleSavruttik Aagam Sootraani 1 Part 40 Kalpsutra Moolam Chatusharan Tandulvaicharik Gacchachar Mool evam VruttiMool evam Vrutti
Original Sutra AuthorN/A
AuthorAnandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
PublisherVardhaman Jain Agam Mandir Samstha Palitana
Publication Year2017
Total Pages394
LanguagePrakrit, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & agam_kalpsutra
File Size105 MB
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